संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पेश किए गए गाज़ा शांति फ्रेमवर्क को मंजूरी दे दी। यह प्रस्ताव 20 बिंदुओं पर आधारित है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सैनिकों की तैनाती, पुनर्निर्माण की रूपरेखा और गवर्नेंस मॉडल शामिल है। वोटिंग में ब्रिटेन, फ्रांस और सोमालिया समेत 13 देशों ने समर्थन किया, जबकि रूस और चीन मतदान से दूर रहे। किसी सदस्य देश ने प्रस्ताव का विरोध नहीं किया।
इससे पहले, ट्रंप की योजना के शुरुआती चरण के चलते इजरायल और हमास ने दो साल से चले आ रहे संघर्ष को रोकने और बंधक-रिहाई समझौते पर सहमति जताई थी। UNSC की स्वीकृति के बाद अब यह शांति ब्लूप्रिंट अंतरराष्ट्रीय मैंडेट का रूप ले चुका है।
ट्रंप के 20-पॉइंट प्लान में क्या शामिल?
सुरक्षा परिषद के दस्तावेज़ में ट्रंप के पूरे खाके को जगह दी गई है। इसके तहत संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को एक “बोर्ड ऑफ पीस” में शामिल होने का आमंत्रण दिया गया है, जो गाज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण, आर्थिक स्थिरता और प्रशासनिक दिशा तय करेगा। यह अंतरिम निकाय गाज़ा के संक्रमण काल का संचालन करेगा। अमेरिका के यूएन राजदूत माइक वाल्ट्ज के अनुसार, यह प्रस्ताव न केवल गाज़ा के भविष्य को स्थिरता देगा बल्कि इजरायल की सुरक्षा ढांचे को भी मजबूत करेगा।
गाज़ा में आएगी अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण फोर्स
शांति खाके में एक नई अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण फोर्स (ISF) की तैनाती का सुझाव दिया गया है। यह बल इजरायल, मिस्र और नव-प्रशिक्षित फिलिस्तीनी पुलिस के साथ मिलकर सीमा सुरक्षा और गाज़ा को डीमिलिटराइज़ करने में अहम भूमिका निभाएगा।
योजना में एक नई ट्रांजिशनल गवर्निंग बॉडी- बोर्ड ऑफ पीस बनाने की बात भी है जिसका नेतृत्व सिद्धांत रूप से ट्रंप को सौंपा जा सकता है। प्रस्ताव में भविष्य में एक संभावित फिलिस्तीनी राज्य का संकेत भी शामिल है।
हमास का विरोध क्यों खारिज किया प्रस्ताव?
गाज़ा पर शासन करने वाले संगठन हमास ने UNSC द्वारा अनुमोदित इस ब्लूप्रिंट को सीधे तौर पर अस्वीकार कर दिया है। संगठन का कहना है कि यह मसौदा फिलिस्तीनियों के अधिकारों और मूल मांगों को संबोधित नहीं करता।
हमास का आरोप है कि यह प्रस्ताव गाज़ा पर एक अंतरराष्ट्रीय ट्रस्टीशिप थोपने की कोशिश है, जिसका समूह लंबे समय से विरोध करता रहा है। इसके अलावा योजना में ISF को हथियारबंद समूहों को निष्क्रिय करने की अनुमति दिए जाने पर भी हमास ने कड़ी आपत्ति जताई है।