बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भविष्य को लेकर देश में तनाव का माहौल है। अगले 24 घंटे में उनके खिलाफ विशेष ट्रिब्यूनल का फैसला आने वाला है। 2024 में जुलाई और अगस्त में हुए बड़े आंदोलन के दौरान हसीना पर 1400 से अधिक हत्याओं में शामिल होने के आरोप लगाए गए थे।
हाई अलर्ट में बांग्लादेश
यूनुस सरकार ने सुरक्षा बढ़ा दी है और पूरे देश में हाई अलर्ट जारी किया है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं। यदि अदालत हसीना को मृत्युदंड देती है, तो देश में हालात गंभीर हो सकते हैं। कानून प्रवर्तन एजेंसियां पहले ही किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए तैयार हैं।
आरोप और ट्रिब्यूनल प्रक्रिया
विशेष ट्रिब्यूनल के सामने हसीना पर पिछले साल हुए एंटी-गवर्नमेंट प्रदर्शनों के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों का आरोप है। मुख्य अभियोजक ने हसीना के लिए मृत्युदंड की मांग की है। ट्रिब्यूनल में 28 कार्य दिवसों में 54 गवाहों ने गवाही दी है, जिसमें बताया गया कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ किस तरह की कार्रवाई की गई थी।
अन्य प्रमुख आरोपी
हसीना के अलावा उनके गृह मंत्री आसदुज्जमान खान कमाल और तत्कालीन पुलिस महानिदेशक चौधरी अब्दुल्लाह अल-मामून भी आरोपियों में शामिल हैं। अब्दुल्लाह अल-मामून ने मुकदमे में सरकारी गवाह के रूप में सहयोग किया है।
राजनीतिक विवाद और प्रत्यर्पण
हसीना और अन्य आरोपी भारत में शरण लिए हुए हैं। यूनुस सरकार ने हसीना का भारत से प्रत्यर्पण मांगा है, लेकिन भारत ने अभी तक इस पर कोई निर्णय नहीं लिया। अवामी लीग ने भी आईसीसी में याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि यूनुस सरकार मानवता के खिलाफ अपराधों में शामिल है।
सत्ता से हटने के बाद की स्थिति
5 अगस्त 2024 को छात्र-नेतृत्व वाले बड़े आंदोलन के कारण हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद हसीना और उनके समर्थक कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। हसीना ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया के साथ बातचीत में ट्रिब्यूनल को “कंगारू कोर्ट” बताया और कहा कि यह पूरी तरह राजनीतिक विरोधियों से प्रेरित है।