पीएम मोदी का गुजरात दौरा: जनजातीय गौरव दिवस पर ₹9,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन

Vin News Network
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पीएम नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 नवंबर को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर गुजरात का दौरा करेंगे। इस दौरान वे भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती समारोह में भाग लेंगे और नर्मदा जिले में आदिवासी कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी 9,700 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे।

आदिवासी कल्याण और शिक्षा पर जोर
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, यह दौरा आदिवासी समुदायों के उत्थान और विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। देडियापाड़ा में आयोजित एक कार्यक्रम के तहत पीएम मोदी लाखों आदिवासियों को घर की सौगात देंगे। इसी अभियान के अंतर्गत बने 1 लाख घरों का गृह प्रवेश भी किया जाएगा। शिक्षा क्षेत्र में प्रधानमंत्री मोदी लगभग 1,900 करोड़ रुपये की लागत से बने 42 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, 2,320 करोड़ रुपये की लागत से 50 नए एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों की आधारशिला भी रखी जाएगी, जिसका उद्देश्य आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना है।

बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी को मजबूती
प्रधानमंत्री मोदी आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए 748 किलोमीटर लंबी नई सड़कों की आधारशिला रखेंगे। इसके साथ ही गुजरात के 14 आदिवासी जिलों में 250 नई बसों को हरी झंडी दिखाई जाएगी। इसके अलावा, 228 बहुउद्देशीय केंद्रों का उद्घाटन भी किया जाएगा, जो सामुदायिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण स्थल होंगे। प्रधानमंत्री जनजातीय बहु-विपणन केंद्रों (TMMCs) की स्थापना के तहत 14 केंद्रों की आधारशिला भी रखेंगे, जिससे आदिवासी उत्पादों की विपणन क्षमता में सुधार होगा।

कार्यक्रम की रूपरेखा
15 नवंबर को पीएम मोदी दोपहर लगभग 12:45 बजे नर्मदा जिले के देवमोगरा मंदिर में पूजा और दर्शन करेंगे। इसके बाद दोपहर करीब 2:45 बजे वे देडियापाड़ा पहुंचेंगे, जहां परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे और उपस्थित जनसमूह को संबोधित करेंगे। इस अवसर पर असम मेडिकल कॉलेज, डिब्रूगढ़ में सेंटर ऑफ कॉम्पिटेंस और इंफाल, मणिपुर में जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRI) भवन का उद्घाटन भी शामिल होगा।

इस दौरे का उद्देश्य न केवल आदिवासी कल्याण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रगति करना है, बल्कि आदिवासी संस्कृति और विरासत के संरक्षण को भी प्रोत्साहित करना है।

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