आजम खान का छलका दर्द: ‘जेल बदलते वक्त था एनकाउंटर का डर, बेटे से कहा था- जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे’

Vin News Network
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आज़म खान
Highlights
  • जेल शिफ्टिंग और एनकाउंटर का डर।
  • जेल में अलग होने से पहले आजम ने अपने बेटे से कहा, जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे, नहीं तो ऊपर मिलेंगे।

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने एक बार फिर अपने कठिन दिनों को याद करते हुए भावुक बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सदस्य कपिल सिब्बल के साथ हुई लंबी बातचीत के दौरान आजम ने बताया कि जब उन्हें रामपुर जेल से सीतापुर जेल स्थानांतरित किया जा रहा था, उस वक्त उन्हें एनकाउंटर का डर सता रहा था।

अलग गाड़ियों में बिठाया गया था मुझे और अब्दुल्ला को
आजम खान ने कहा, ‘रात तीन बजे हमें अचानक नींद से उठाया गया। मेरे लिए अलग गाड़ी थी और मेरे बेटे अब्दुल्ला को दूसरी गाड़ी में बिठाया गया। उस समय मुझे जेल में सुनी हुई एनकाउंटर की बातें याद आ रही थीं। एक पिता के लिए वह पल बेहद दर्दनाक था।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हम दोनों गले मिले और मैंने बेटे से कहा- ‘जिंदगी रही तो फिर मिलेंगे, नहीं तो ऊपर मिलेंगे।’ जब तक दोनों जेलों में सुरक्षित पहुंच गए तब जाकर चैन मिला।’

छात्र राजनीति से लेकर जेल यात्रा तक की खुलकर चर्चा
खास बातचीत में आजम खान ने अपने छात्र जीवन, राजनीति की शुरुआत और जेल में बिताए दिनों का भी जिक्र किया।
उन्होंने बताया कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पढ़ाई के दौरान आपातकाल के समय उन्हें देशद्रोह के आरोप में जेल भेजा गया था।

प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह का मैं आभारी हूं
आजम खान ने बातचीत में कहा कि उन्हें जेल के उस हिस्से में रखा गया था जहां कभी मशहूर डाकू सुंदर सिंह बंद था जिसे बाद में फांसी दी गई।
उन्होंने बताया कि जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने बीड़ी मजदूरों और बुनकरों की आवाज उठाई और उस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने हमेशा उनका सहयोग किया।

94 मुकदमे झूठे सिर्फ यूनिवर्सिटी बनाना गुनाह बन गया
सपा नेता ने कहा कि उनके खिलाफ दर्ज 94 मुकदमे बेबुनियाद हैं। उनका कहना था, ‘मैंने यूनिवर्सिटी बनाई यही मेरा गुनाह बन गया। मुझे जेल में नहीं, फांसीघर में रखा गया।’ उन्होंने यह भी कहा कि पहले की सरकारों में राजनीतिक मतभेद होते थे लेकिन बदले की भावना नहीं जबकि आज की राजनीति पूरी तरह प्रतिशोध में बदल गई है।

मुजरिम के रूप में सदन में नहीं जाना चाहता
आगे की राजनीति पर बात करते हुए आजम खान ने कहा, ‘मैं चाहता हूं कि जब तक समाजवादी सरकार आए तब तक मेरे ऊपर लगे मुकदमों के दाग मिट जाएं। मैं हाउस में एक मुजरिम के रूप में नहीं जाना चाहता।’

सोशल मीडिया पर वायरल हुई बातचीत
आजम खान और कपिल सिब्बल के बीच हुई यह बातचीत सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। वीडियो में आजम खान ने अपने संघर्ष, जेल के अनुभव और राजनीतिक परिस्थितियों पर बेबाकी से अपनी बात रखी।

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