महाराष्ट्र के सातारा जिले की फलटण तहसील में 28 वर्षीय महिला डॉक्टर की आत्महत्या ने पूरे राज्य में चिंता और आक्रोश पैदा कर दिया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित सब-इंस्पेक्टर गोपाल बदाने और एक अन्य व्यक्ति को गिरफ्तार किया। आत्महत्या से पहले पीड़िता ने अपने हाथ की हथेली पर दोनों आरोपियों के नाम लिखे थे जिससे उनके मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न की गंभीरता सामने आई।
आरोपी पुलिसकर्मी निलंबित
घटना सामने आने के बाद गोपाल बदाने को तुरंत निलंबित कर दिया गया। सुसाइड नोट में पीड़िता ने पुलिस अधिकारी पर कई बार दुष्कर्म और मानसिक उत्पीड़न का आरोप लगाया साथ ही बताया कि एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में भी उसे मानसिक उत्पीड़न झेलना पड़ा।
सांसद और अन्य अधिकारियों का नाम भी जुड़ा
इस मामले में एक सांसद के नाम का जुड़ना इसे राजनीतिक और संवेदनशील मामला बना देता है। पुलिस ने पहले आरोपी को गिरफ्तार कर चार दिन की हिरासत में भेजा। पीड़िता का अंतिम संस्कार बीड जिले के वडवानी तहसील में हुआ जहां उनके रिश्तेदारों ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की।
मुख्यमंत्री का बयान
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और गृह मंत्री ने कहा कि मामले में शामिल सभी लोगों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने पीड़िता की हिम्मत की सराहना करते हुए कहा कि उसने अत्यधिक पीड़ा सहने के बावजूद अपनी हथेली पर आरोपियों के नाम लिखे। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी आरोप लगाया कि वे इस संवेदनशील मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं।
विपक्ष और डॉक्टर संगठनों की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब पीड़िता ने पहले शिकायत दर्ज कराई थी तब कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस और शिवसेना के नेताओं ने स्वतंत्र जांच और एसआइटी गठित करने की मांग की। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) और फेडरेशन ऑफ आल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने घटना की कड़ी निंदा की और न्यायपूर्ण कार्रवाई की मांग की।
सुसाइड नोट में उठाए गए आरोप
पीड़िता ने अपने चार पृष्ठों के सुसाइड नोट में आरोप लगाया कि उन्हें फर्जी मेडिकल फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करने के लिए दबाव डाला गया। इसके अलावा उन्होंने सांसद के दो निजी सहायकों के अभद्र व्यवहार का भी उल्लेख किया और बताया कि उनके ऊपर अनुचित दबाव बनाया गया।
न्याय और कानून व्यवस्था की चिंता
राज्य में कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठे हैं। कई नेताओं ने कहा कि सिर्फ जांच आदेश देना पर्याप्त नहीं है दोषी अधिकारियों को नौकरी से बर्खास्त करना चाहिए। डॉक्टर संगठनों और विपक्ष ने फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमे की मांग भी की है।