जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर कानूनी विवादों में घिरते नजर आ रहे हैं। पश्चिम चंपारण (बेतिया) से सांसद डॉ. संजय जायसवाल द्वारा दर्ज कराए गए 125 करोड़ रुपये के मानहानि के मुकदमे को कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। गुरुवार को सब-जज प्रथम प्रतीक आनंद द्विवेदी की अदालत में मामले की सुनवाई हुई, जिसके बाद प्रशांत किशोर के खिलाफ समन जारी करने का आदेश दिया गया।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत तब हुई जब प्रशांत किशोर ने एक सार्वजनिक बयान में सांसद संजय जायसवाल को “टूटपुंजिया नेता” बताया और उन पर आरोप लगाया कि उन्होंने एक पेट्रोल पंप के व्यावसायिक हित के लिए छावनी फ्लाईओवर का एलाइनमेंट बदला। इस बयान से आहत होकर सांसद ने पहले प्रशांत किशोर को लीगल नोटिस भेजा और अब कोर्ट में मानहानि का दावा दाखिल किया है।
अदालती कार्यवाही का विवरण
सुनवाई के दौरान सांसद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार वर्मा और राजेश रंजन ने कोर्ट में पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि यह मामला न केवल राजनीतिक गरिमा को ठेस पहुंचाने का है, बल्कि जानबूझकर बदनाम करने की एक कोशिश है।
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए इसे एडमिट कर लिया और प्रशांत किशोर को समन भेजने का आदेश दिया। साथ ही सांसद की ओर से दाखिल “मैंडेटरी इंजेक्शन पिटीशन” पर भी विचार करते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
क्या है सांसद का पक्ष?
सांसद संजय जायसवाल के मुताबिक, प्रशांत किशोर ने गलत जानकारी और झूठे आरोपों के जरिए उनकी छवि को नुक़सान पहुंचाने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार नेता को इस तरह की बयानबाज़ी शोभा नहीं देती और इसका जवाब कानून के माध्यम से दिया जाएगा।
आगे क्या होगा?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रशांत किशोर इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं। समन जारी हो चुका है और अगली सुनवाई की तारीख में उनका जवाब आना तय है। यह मामला आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है।