केंद्र सरकार ने देश भर में 57 अतिरिक्त केंद्रीय विद्यालय खोलने का ऐलान किया है और इनमें से 19 विद्यालय बिहार को आवंटित किए गए हैं जिसमें राज्य के छह आकांक्षी जिले भी शामिल हैं और कुल मिलाकर 18 जिलों के छात्र-छात्राओं को लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री स्तर पर नहीं बल्कि प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट में लिए गए इस फैसले के अनुसार इन स्कूलों के निर्माण व संचालन पर अगले नौ वर्षों में लगभग ₹5,863 करोड़ खर्च किए जाएंगे धनराशि का प्रवाह वित्त वर्ष 2026 – 27 से शुरू होगा। सरकारी बयान में बताया गया है कि इनमें से कुछ विद्यालय गृह मंत्रालय के प्रस्ताव पर और अधिकतर राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों की मांग के आधार पर खोले जा रहे हैं तथा 20 विद्यालय उन जिलों में स्थापित किए जाएंगे जहाँ पहले कोई केवी नहीं था।
नए केवी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप आदर्श मॉडल पर विकसित किए जाएंगे और पहली बार इनमें पूर्व-प्राथमिक स्तर की बालवाटिका की व्यवस्था भी शामिल की जाएगी। राज्य में मधुबनी जिले को विशेष रूप से दो केंद्रीय विद्यालय दिए जा रहे हैं। इन विद्यालयों के खुलने से करीब 87,000 छात्रों को बेहतर शैक्षिक अवसर मिलेंगे और अनुमानतः लगभग 4,600 स्थायी शिक्षण/कर्मचारी पद सृजित होंगे साथ ही निर्माण व परिचालन से अस्थायी रोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। सरकार का तर्क है कि यह पहल शिक्षा की पहुँच बढ़ाने, क्षेत्रीय संतुलन कायम करने और केंद्र सरकार के कर्मचारियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर की जा रही है।