नई दिल्ली। दक्षिण एशिया के गणितीय योगदान और पांडुलिपियों की विरासत को वैश्विक मंच पर पेश करने के लिए राजधानी नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में 5 से 14 सितंबर तक एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन किया जा रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर आज यानि 4 सितंबर को इस प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।
आयोजन समिति के प्रमुख और पूर्व आईएएस अधिकारी के.एन. श्रीवास्तव, जो IIC के निदेशक भी हैं, ने बताया कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस सोच से जुड़ा है जिसमें उन्होंने भारत के पारंपरिक ज्ञान को दुनिया से साझा करने की बात कही थी।
‘सभ्यतागत संवाद मंच’ की दिशा में कदम
श्रीवास्तव ने कहा कि यह प्रदर्शनी हाल ही में चीन के तियानजिन में हुए शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तावित ‘सभ्यतागत संवाद मंच’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने कहा था कि दक्षिण एशिया की प्राचीन परंपराओं और साहित्य को वैश्विक मंच तक पहुंचाना चाहिए।
सम्मेलन का महत्व और उद्देश्य
विदेश मंत्रालय के सहयोग से आयोजित इस सम्मेलन में प्राचीन पांडुलिपियों, मूर्तिकला, शिलालेख और पाम पत्तों पर लिखे ज्ञान के संरक्षण और पुनर्पाठ पर चर्चा होगी। श्रीवास्तव ने बताया कि आगे भी कई विषयों पर ऐसे सम्मेलन होंगे, जिनमें श्रुति-स्मृति, मौखिक परंपरा और पांडुलिपियों से जुड़े योगदान को प्रस्तुत किया जाएगा। उनका कहना है कि यह आयोजन वैश्विक स्तर पर भारतीय ज्ञान और परंपराओं को जोड़ने में मदद करेगा और भारत की बौद्धिक विरासत को नई पीढ़ी के सामने रखेगा।
युवाओं के लिए विशेष संदेश
दो दिन के इस सम्मेलन और प्रदर्शनी का उद्देश्य युवाओं को आर्यभट्ट, ब्रह्मगुप्त और भास्कर द्वितीय जैसे प्राचीन गणितज्ञों के योगदान से परिचित कराना है। श्रीवास्तव ने कहा, “यह हमारे युवाओं के लिए बेहद फायदेमंद होगा और दुनिया को प्राचीन भारत की उपलब्धियों से अवगत कराएगा।”
SAMHiTA (South Asian Manuscript History and Textual Archive) परियोजना की निदेशक सुधा गोपालकृष्णन ने बताया कि गणित का असर संगीत, नृत्य, वास्तुकला और मूर्तिकला जैसे क्षेत्रों में भी देखा जा सकता है। सम्मेलन में भास्कर की प्रसिद्ध पुस्तक ‘लीलावती’ जैसे पाठों को शिक्षा प्रणाली में शामिल करने के नए तरीकों पर भी चर्चा होगी। इससे शिक्षा को अधिक रोचक और प्रयोगात्मक बनाया जा सकेगा।
प्रदर्शनी और प्रमुख व्यक्तित्व
यह प्रदर्शनी 5 से 14 सितंबर तक इंडिया इंटरनेशनल सेंटर, नई दिल्ली में आयोजित होगी। इसमें प्राचीन से आधुनिक गणितज्ञों जैसे
- आर्यभट्ट
- ब्रह्मगुप्त
- भास्कर द्वितीय
- श्रीनिवास रामानुजन
- सीआर राव के योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा।
उद्घाटन सत्र में पूर्व विदेश सचिव श्याम सरन और प्रख्यात गणितज्ञ प्रो. मंजीत भार्गव भी संबोधित करेंगे। यह आयोजन IIT बॉम्बे के सेंटर फॉर ट्रेडिशनल इंडियन नॉलेज सिस्टम्स एंड स्किल्स और विदेश मंत्रालय के सहयोग से हो रहा है।
वैश्विक दृष्टिकोण और भारतीय योगदान
सम्मेलन में गणित के ऐतिहासिक विकास और एशियाई ज्ञान प्रणालियों के बीच हुए सांस्कृतिक एवं बौद्धिक आदान-प्रदान पर भी विचार किया जाएगा। आयोजकों का कहना है कि इससे भारत की बौद्धिक विरासत को न केवल संरक्षित किया जाएगा बल्कि वैश्विक समुदाय से भी जोड़ा जाएगा। यह आयोजन भारतीय गणितीय परंपराओं को उजागर करने के साथ-साथ दुनिया को यह संदेश भी देता है कि भारत की सभ्यता और ज्ञान परंपरा कितनी गहरी और व्यापक रही है।
भारतीय परंपरा को दुनिया तक पहुंचाने का अवसर
आयोजक उम्मीद कर रहे हैं कि यह सम्मेलन और प्रदर्शनी न केवल भारत की प्राचीन गणितीय उपलब्धियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखेगा बल्कि नई पीढ़ी के शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को भी प्रेरित करेगा। इसके माध्यम से दक्षिण एशिया के पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक शिक्षा और शोध में शामिल करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
नई दिल्ली में आयोजित यह अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रदर्शनी प्रधानमंत्री मोदी के विज़न को मूर्त रूप देने की दिशा में बड़ा प्रयास है। दक्षिण एशिया के गणितीय योगदान और पांडुलिपियों की विरासत को वैश्विक स्तर पर प्रस्तुत करना भारतीय सभ्यता और ज्ञान परंपरा के स्वर्णिम अध्याय को दुनिया के सामने लाने का अवसर है।