भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ समय से रिश्तों में खटास देखने को मिली है। इसकी बड़ी वजह टैरिफ विवाद और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बयानबाजी रही। हालांकि स्थिति इतनी गंभीर नहीं हुई कि दोनों देशों के रिश्ते अपूरणीय क्षति की ओर बढ़ते। अब हालात में सुधार के संकेत मिलने लगे हैं। बीते 48 घंटों में ऐसे कई घटनाक्रम हुए हैं जिनसे लगता है कि भारत-अमेरिका रिश्ते फिर से सकारात्मक दिशा पकड़ सकते हैं।
पीयूष गोयल का बड़ा बयान – जल्द हो सकता है व्यापार समझौता
भारत के केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को वार्षिक वैश्विक निवेशक सम्मेलन 2025 में स्पष्ट संकेत दिए कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता जल्द हो सकता है। उन्होंने कहा: “मुझे उम्मीद है कि चीजें पटरी पर आ जाएंगी और हम नवंबर या उसके आसपास एक द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) कर लेंगे, जैसा कि फरवरी में दोनों देशों के नेताओं ने चर्चा की थी।” गोयल ने यह भी स्वीकार किया कि दुनिया भर में व्यापारिक अनिश्चितता का दौर है, लेकिन इसे उन्होंने ‘आधा भरा गिलास’ करार दिया। उनके मुताबिक, चुनौतियों के साथ नए अवसर भी जन्म लेते हैं और भारत इन अवसरों को भुनाने के लिए तैयार है।
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी का बदला लहजा
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट, जो पहले भारत पर तीखे आरोप लगाते रहे थे, अब अपने स्वर बदलते नजर आए। पहले वे आरोप लगाते थे कि रूस से तेल खरीदकर भारत केवल अपने अमीर व्यापारियों को फायदा पहुँचा रहा है। लेकिन अब बेसेंट ने कहा: “भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और उनके मूल्य चीन या रूस की तुलना में अमेरिका के ज्यादा करीब हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत और अमेरिका मिलकर इस समस्या का समाधान निकाल लेंगे।” यह बयान भारत के प्रति अमेरिका की नरमी और निकटता का इशारा करता है।
अलास्का में संयुक्त सैन्य अभ्यास – रक्षा साझेदारी मजबूत
व्यापार विवाद के बावजूद रक्षा और सुरक्षा सहयोग प्रभावित नहीं हुआ है। भारत और अमेरिका की सेनाएं इन दिनों अलास्का में सैन्य अभ्यास कर रही हैं। यह अभ्यास 1 से 14 सितंबर तक चलेगा। 21वें संस्करण के इस अभ्यास में भारत की ओर से मद्रास रेजिमेंट की एक बटालियन हिस्सा ले रही है। अमेरिका की ओर से ब्रिगेड कॉम्बैट टीम शामिल है। यह अभ्यास दोनों देशों की स्थिर सामरिक साझेदारी और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।
USS फ्रैंक केबल का चेन्नई दौरा
अलास्का अभ्यास से ठीक पहले अमेरिकी सबमरीन सपोर्ट शिप USS फ्रैंक केबल ने चेन्नई बंदरगाह का दौरा किया। यह अमेरिका की सैन्य समुद्री परिवहन कमान का दो वर्षों में दूसरा भारत दौरा था। यह इस बात का संकेत है कि रक्षा मोर्चे पर भारत-अमेरिका की भागीदारी गहरी हो रही है, भले ही व्यापार मोर्चे पर उतार-चढ़ाव दिख रहा हो।
चीन की विजय परेड से भारत ने बनाई दूरी
3 सितंबर को चीन की राजधानी बीजिंग में विजय दिवस सैन्य परेड आयोजित हुई। इसमें 25 से अधिक देशों के नेता शामिल हुए। लेकिन भारत ने इस परेड में हिस्सा नहीं लिया। हालांकि प्रधानमंत्री मोदी हाल ही में तियानजिन में SCO समिट में शामिल हुए थे, लेकिन उन्होंने परेड से दूरी बनाकर एक स्पष्ट संकेत दिया—भारत किसी भी सैन्य धुरी में शामिल नहीं है। भारत की प्राथमिकता QUAD देशों (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में संतुलन बनाना है। चीन की सैन्य परेड में शामिल होने से यह संदेश गलत जाता, इसलिए भारत ने कूटनीतिक दूरी बनाई।
रिश्तों की मौजूदा तस्वीर
तनाव: टैरिफ विवाद, अमेरिकी नेताओं की बयानबाजी।
सकारात्मक पहलू: संभावित BTA (द्विपक्षीय व्यापार समझौता)।
रक्षा साझेदारी: संयुक्त सैन्य अभ्यास और नौसैनिक सहयोग जारी।
कूटनीति: चीन की परेड से दूरी बनाकर QUAD के साथ तालमेल मजबूत।
विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के रिश्तों में तनाव अस्थायी है। दोनों देशों के बीच आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग इतना गहरा है कि इसे लंबे समय तक प्रभावित करना संभव नहीं। भारत, अमेरिका के लिए चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने में एक रणनीतिक साझेदार है। वहीं भारत के लिए अमेरिका उच्च तकनीक, निवेश और रक्षा सहयोग का महत्वपूर्ण स्रोत है।