जम्मू-कश्मीर का रामबन जिला शुक्रवार रात भयावह प्राकृतिक आपदा का गवाह बना। राजगढ़ तहसील के गाडीग्रान कुमाटे गांव में रात करीब 11:30 बजे पहाड़ी पर बादल फटा और देखते ही देखते भारी मलबा, पत्थर और पानी दो मकानों और एक गौशाला को बहा ले गया। हादसा इतना अचानक था कि घर में सो रहे लोगों को चीखने या बाहर निकलने तक का मौका नहीं मिला।
चार की मौत, एक महिला लापता
इस हादसे में अश्विनी शर्मा (27), उनके भाई द्वारका नाथ (59), भतीजी वीरता देवी (29) और उनके घर आए मेहमान ओम राज (42) की मौत हो गई। मृतकों के शव मलबे से निकालने में एसडीआरएफ को घंटों मशक्कत करनी पड़ी। अश्विनी शर्मा की भाभी विद्या देवी (50) अब भी लापता हैं। उनकी तलाश रात से ही जारी है।
पहाड़ी पर फटा बादल, स्कूल और मकान बह गए
स्थानीय निवासियों ने बताया कि पहाड़ी पर बने प्राथमिक विद्यालय के पास बादल फटा। इससे आए मलबे ने नीचे बने दो मकानों, गौशाला और स्कूल भवन को बहा दिया। देर रात की तेज आवाज सुनकर लोग मौके पर पहुंचे और बारिश के बीच ही बचाव कार्य शुरू किया।
बचाव अभियान में जुटी टीमें
स्थानीय लोगों ने तुरंत प्रशासन को सूचना दी। रात करीब तीन बजे पुलिस, एसडीआरएफ और बचाव दल मौके पर पहुंचे और लापता लोगों की तलाश शुरू कर दी। सुबह होते-होते शव एक-एक कर मिलते गए। लेकिन विद्या देवी का कोई पता नहीं चला। उपायुक्त मोहम्मद अलयास खान और एसएसपी अरुण गुप्ता सुबह घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि राहत और बचाव अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक महिला का पता नहीं चल जाता।
शोक में डूबा गांव
गाडीग्रान कुमाटे गांव का हर घर मातम में डूबा है। गांव के अजय कुमार ने बताया कि इतने बड़े हादसे की कल्पना किसी ने नहीं की थी। घर में आए मेहमान की भी मौत हो गई, जिससे यह त्रासदी और गहरी हो गई।
रियासी में भूस्खलन से सात की मौत
रामबन के साथ-साथ रियासी जिला भी प्राकृतिक आपदा का शिकार बना। शनिवार तड़के बद्दर गांव में पहाड़ी खिसक गई। भारी मात्रा में मलबा और पत्थर नजीर अहमद (38) के कच्चे मकान पर गिर गए। उस समय नजीर अपने परिवार के साथ सो रहे थे। मलबे के नीचे दबकर नजीर, उनकी पत्नी वजीरा बेगम (35) और उनके पांच बेटे—बिलाल (13), मुस्तफा (11), आदिल (8), मुबारक (6) और वसीम (5) की दर्दनाक मौत हो गई।
सुबह खुला हादसे का राज
गांव के लोगों को इस घटना का पता सुबह हुआ, जब वे जागे। मलबा हटाकर शवों को निकाला गया। सातों शव एक साथ बाहर आते ही पूरे गांव में मातम छा गया। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित परिवार की मदद का आश्वासन दिया।
नेताओं ने जताया शोक
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इन हादसों पर गहरा शोक व्यक्त किया है। दोनों नेताओं ने प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता देने के निर्देश दिए। उमर अब्दुल्ला ने कहा कि “लगातार हो रही बारिश को देखते हुए लोगों और अधिकारियों को पूरी सतर्कता बरतनी चाहिए।”
रामसू में फंसे 30 परिवारों को बचाया गया
रामबन जिले के रामसू इलाके में भूस्खलन से फंसे 30 परिवारों को बचाव दलों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक और बारिश की चेतावनी दी है, जिसके बाद प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है।
स्थानीय लोगों की भूमिका
हादसे के तुरंत बाद सबसे पहले स्थानीय लोग ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने बारिश और अंधेरे की परवाह किए बिना राहत कार्य शुरू किया। ग्रामीणों के सहयोग से ही पुलिस और एसडीआरएफ को मलबा हटाने और शवों को निकालने में मदद मिली।
सरकारी राहत और मदद
उपायुक्त रामबन मोहम्मद अलयास खान ने कहा कि प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत दी जा रही है। प्रशासन ने अस्थायी आश्रय, खाने-पीने का सामान और मुआवजा देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। वहीं, रियासी प्रशासन ने भी मृतकों के परिजनों को सांत्वना दी और राहत पैकेज की घोषणा की।
अचानक आई आपदा ने छीनी जिंदगियां
रामबन और रियासी की ये घटनाएं बताती हैं कि पहाड़ी इलाकों में प्राकृतिक आपदाएं कितनी अचानक आती हैं और कितनी बड़ी तबाही मचा जाती हैं। एक ही रात में 11 लोग, जिनमें पांच मासूम बच्चे भी शामिल हैं, हमेशा के लिए जीवन से विदा हो गए।