एएमयू मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल 30 घंटे बाद खत्म, सेवाएं फिर बहाल

30 घंटे बाद फिर से खुला जेएन मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी गेट, मरीजों के चेहरे पर लौटी मुस्कान

Vin News Network
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30 घंटे बाद फिर से खुला जेएन मेडिकल कॉलेज का इमरजेंसी गेट
Highlights
  • 30 घंटे बाद हड़ताल खत्म
  • एएमयू मेडिकल की सेवाएं बहाल
  • डॉक्टर-छात्र विवाद से मचा हंगामा

अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के जेएन मेडिकल कॉलेज में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल आखिरकार 30 घंटे बाद समाप्त हो गई। 28 अगस्त की रात को शुरू हुई यह हड़ताल 30 अगस्त की तड़के करीब 3 बजे खत्म हुई। हड़ताल खत्म होते ही इमरजेंसी और ओपीडी की सेवाएं बहाल कर दी गईं और मरीजों को राहत मिली।

घटना की शुरुआत
28 अगस्त की रात लगभग 8:30 बजे बीएएलएलबी (BALLB) के छात्र अपने एक साथी का इलाज कराने के लिए मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में पहुंचे। यहां शीघ्र उपचार को लेकर छात्रों और ड्यूटी पर मौजूद जूनियर डॉक्टरों के बीच कहासुनी हो गई। विवाद इतना बढ़ा कि दोनों पक्षों में मारपीट हो गई।

घटना के बाद नाराज डॉक्टरों ने इमरजेंसी की सेवाएं ठप कर दीं और गेट पर ताला जड़ दिया। मरीजों के परिजनों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

मामले को सुलझाने की कोशिशें
घटना की जानकारी मिलते ही रात में ही प्रशासनिक अफसर मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। हालांकि शुरुआती कोशिशें नाकाम रहीं। 29 अगस्त को पूरे दिन डॉक्टरों को मनाने के प्रयास होते रहे, लेकिन हड़ताल खत्म नहीं हुई। मरीज और उनके परिजन घंटों तक परेशान रहे।

छात्र पर कार्रवाई
विवाद बढ़ता देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया। डॉक्टरों से मारपीट करने के आरोपी बीएएलएलबी तृतीय वर्ष के छात्र मोहम्मद मुज्तबा को निलंबित कर दिया गया। इस कदम के बाद डॉक्टरों ने अपनी मांगों को गंभीरता से लिए जाने पर हड़ताल खत्म करने का फैसला किया।

हड़ताल खत्म होने के बाद राहत
30 अगस्त की तड़के करीब 3 बजे जूनियर डॉक्टर काम पर लौट आए। इमरजेंसी और ओपीडी की सेवाएं शुरू कर दी गईं। मरीजों को बड़ी राहत मिली और अस्पताल का माहौल सामान्य हो गया। डॉक्टरों ने कहा कि मारपीट करने वालों पर कार्रवाई किए जाने के बाद ही उन्होंने काम पर लौटने का निर्णय लिया।

प्रशासन और प्रबंधन का रुख
विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि मरीजों की सुरक्षा और इलाज प्राथमिकता है। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। डॉक्टरों के साथ सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

मरीजों की दिक्कतें
हड़ताल के दौरान इमरजेंसी बंद होने से कई मरीजों को इलाज में परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ मरीजों को बाहर के अस्पतालों का रुख करना पड़ा। ओपीडी सेवाएं बंद होने से भी बड़ी संख्या में मरीज लौट गए।

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