उत्तराखंड में मानसून की बारिश का कहर जारी है। सिमली-ग्वालदम नेशनल हाईवे गौचर-कमेड़ा के पास शनिवार सुबह बड़ा हादसा टल गया जब अचानक मलबा गिरने से एक यात्री बस मलबे में फंस गई। बस में सवार यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं, लेकिन हाईवे दोनों ओर से जाम हो गया है। सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन लंबी कतार में फंसे हैं।
बीआरओ (सीमा सड़क संगठन) की टीम मौके पर जुटी है और जेसीबी की मदद से बोल्डरों को हटाने का काम किया जा रहा है। पहाड़ी से लगातार पत्थर और मलबा आने के कारण राहत कार्य धीमा पड़ रहा है।
कर्णप्रयाग-नैनीसैंण मार्ग बंद, गांवों का संपर्क टूटा
दूसरी ओर कर्णप्रयाग-नैनीसैंण मोटर मार्ग भी भारी मलबे के कारण पूरी तरह ठप है। कनखुल तल्ला के पास शनिवार सुबह दोबारा मलबा गिरा, जिससे बीते 24 घंटे से यह मार्ग बंद है।
इससे कपीरी पट्टी के दर्जनों गांव मुख्य बाजार से कट गए हैं। ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरत की चीजों के लिए भी भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्कूली बच्चे और मरीजों को अस्पताल पहुंचने में दिक्कतें आ रही हैं।
मौसम विभाग ने फिर जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि राज्य में अगले 5 दिन भारी बारिश का दौर जारी रहेगा। कई जिलों में येलो अलर्ट घोषित किया गया है। मौसम विभाग के निदेशक सीएस तोमर ने कहा – “मानसून की सक्रियता 15 सितंबर तक बनी रहेगी। 15 सितंबर के बाद बारिश थोड़ी हल्की पड़ सकती है, लेकिन सितंबर के आखिर तक मानसून पूरी तरह विदा होगा।”
इस बार उत्तराखंड में मानसून का रिकॉर्ड औसत से ज्यादा है। लगातार बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरुद्ध और जनजीवन प्रभावित होने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
यात्रियों और ग्रामीणों की अपील
स्थानीय लोग और यात्री सरकार से वैकल्पिक मार्ग खोलने की मांग कर रहे हैं। यात्रियों को घंटों तक हाईवे पर फंसा रहना पड़ा। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार राहत टीम समय पर नहीं पहुंच पाती जिससे हालात और बिगड़ जाते हैं।
प्रशासन की तैयारियां
प्रशासन ने बीआरओ और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट पर रखा है। फंसी हुई बस और वाहनों को निकालने की कोशिशें जारी हैं। पहाड़ी इलाकों में अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की गई है। स्कूल और कार्यालयों को जरूरत पड़ने पर बंद करने की तैयारी है।
उत्तराखंड में इस बार मानसून लगातार चुनौती बनकर सामने आ रहा है। पहाड़ी जिलों में सड़क अवरुद्ध होने से स्थानीय जनता और यात्री दोनों ही मुश्किलों में हैं। मौसम विभाग की चेतावनी के बाद आने वाले 15 दिन और भी भारी साबित हो सकते हैं।