लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की आमदनी दोगुनी करने और खेती को लाभकारी बनाने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों पर सब्सिडी दे रही है। इसके लिए ‘कृषि यंत्रीकरण योजना’ के तहत किसानों को कई अत्याधुनिक यंत्रों की खरीद पर सरकारी अनुदान (सब्सिडी) प्रदान किया जा रहा है।
लेकिन कृषि विभाग ने हाल ही में किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी की है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि नियमों का पालन न करने पर अनुदान नहीं मिलेगा। सरकार की कोशिश है कि किसानों को उच्च तकनीकी संसाधन मिलें, लेकिन पारदर्शिता के साथ।
कृषि यंत्रीकरण योजना का उद्देश्य
यह योजना किसानों को आधुनिक खेती के लिए जरूरी यंत्र उपलब्ध कराने के मकसद से शुरू की गई है। इससे:
- समय की बचत होती है
- उत्पादन में वृद्धि होती है
- मजदूरी और लागत में कटौती होती है
- फसल गुणवत्ता बेहतर होती है
- इस योजना के अंतर्गत किसानों को डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से सब्सिडी दी जाती है।
कौन-कौन सी योजनाएं चल रही हैं?
- सब मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन
- प्रमोशन ऑफ एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन फार इन सीटू मैनेजमेंट ऑफ क्राप रेज्ड्यू
- कस्टम हायरिंग सेंटर योजना
- हाईटेक हब योजना
इन योजनाओं में किसानों को अनुदानित दर पर कृषि यंत्र मुहैया कराए जाते हैं।
जरूरी सावधानियां – वरना नहीं मिलेगा अनुदान
- किसानों को केवल उन्हीं फर्मों से कृषि यंत्र खरीदने की अनुमति है जो सरकार के पोर्टल पर पंजीकृत हैं।
- कृषि यंत्र पर स्पष्ट रूप से सीरियल नंबर अंकित होना चाहिए।खरीद के समय फर्म से ई-वे बिल लेना जरूरी है।
- कम से कम 50% धनराशि किसान को अपने बैंक खाते से ही भुगतान करनी होगी। यदि किसान निरक्षर है, तो ब्लड रिलेशन वाले खाते से भुगतान किया जा सकता है।
- ₹10,000 से अधिक अनुदान वाले यंत्रों के लिए ₹100 के स्टांप पेपर पर शपथ पत्र देना होगा।
यंत्रों की फिजिकल वेरिफिकेशन जरूरी
जिले के उप कृषि निदेशक या उनके द्वारा नियुक्त अधिकारी किसान द्वारा खरीदे गए यंत्र का स्थल पर जाकर सत्यापन करेंगे।
सत्यापन में निम्न बातों का परीक्षण होगा:
- किसान का विवरण दर्शन पोर्टल पर सही है या नहीं
- यंत्र वास्तव में स्थल पर मौजूद है या नहीं
- वंचित रह जाएंगे ये किसान अगर… अगर किसान इन शर्तों का पालन नहीं करता:
- रजिस्टर्ड फर्म से खरीद नहीं करता
- सीरियल नंबर नहीं होता
- भुगतान खुद के खाते से नहीं होता
- ई-वे बिल नहीं लेता
…तो सरकार द्वारा अनुदान नहीं दिया जाएगा।
- आवृत्ति नियम – एक ही यंत्र पर बार-बार नहीं मिलेगा अनुदान
- मानव या पशुचालित यंत्र: 3 साल तक दोबारा अनुदान नहीं मिलेगा
- शक्ति चालित यंत्र: 5 साल के बाद ही पुनः वही यंत्र अनुदान पर खरीद सकते हैं
- फार्म मशीनरी बैंक या हाईटेक हब वाले यंत्र: 10 साल बाद ही अनुदान मिलेगा
किसानों को जागरूक कर रहा है विभाग
कृषि विभाग इन नियमों को लेकर किसानों को जागरूक कर रहा है। कई जिलों में कैंप लगाकर यंत्रों की बुकिंग, पोर्टल पंजीकरण, भुगतान प्रक्रिया और अनुदान की तकनीकी जानकारी दी जा रही है।
क्यों जरूरी है ये एडवाइजरी?
बीते वर्षों में यह देखा गया कि अनुदान पाने की होड़ में कई किसानों ने गलत फर्मों से यंत्र खरीदे या फर्जी दस्तावेज लगाए, जिससे सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता प्रभावित हुई। अब सरकार नियमों को सख्ती से लागू कर रही है ताकि सही किसान को सही लाभ मिले।