अयोध्या। राम मंदिर आंदोलन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित फिल्म ‘695 द अयोध्या’ अब सिनेमा के परदे पर दस्तक देने को तैयार है। यह फिल्म 5 अगस्त 2025 को अवध मॉल, अयोध्या में रिलीज की जाएगी। यह महज एक फिल्म नहीं, बल्कि एक ऐतिहासिक दस्तावेज की तरह है जिसमें राम मंदिर आंदोलन की 500 वर्षों की संघर्ष गाथा को दर्शाया गया है।
फिल्म का नाम और उसकी ऐतिहासिक गहराई
फिल्म के शीर्षक ‘695’ के पीछे छुपा है एक गहरा और प्रतीकात्मक अर्थ:
- 6 – 6 दिसंबर 1992: बाबरी ढांचे का विध्वंस, जब कारसेवकों ने विवादित ढांचे को गिराया
- 9 – 9 नवंबर 2019: सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय, जिसमें राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ
- 5 – 5 अगस्त 2020: भूमि पूजन समारोह, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीराम मंदिर निर्माण की नींव रखी
इन तीनों तिथियों को एक सूत्र में पिरोकर ही फिल्म का नाम रखा गया है ‘695 द अयोध्या’, जो अपने आप में एक काल-यात्रा है।
प्रेस वार्ता में खुलासा
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी शरद शर्मा ने आज कारसेवकपुरम में आयोजित पत्रकार वार्ता में इस फिल्म से जुड़ी प्रमुख जानकारियाँ साझा कीं। उन्होंने बताया कि यह फिल्म सिर्फ एक चलचित्र नहीं बल्कि श्रद्धा, आंदोलन और न्याय की त्रयी है।
मुख्य कलाकार और उनके किरदार
फिल्म में कई नामचीन कलाकारों ने प्रमुख ऐतिहासिक किरदारों को जीवंत किया है:
- अरुण गोविल – बाबा अभिराम दास (1949 में रामलला प्राकट्य के समय के प्रमुख संत)
- विकास महंते – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- के के रैना – लालकृष्ण आडवाणी
- गोविंद नामदेव – स्वामी शंभू दास जी
- अखिलेन्द्र मिश्र – स्वामी कृष्णदास जी
- अशोक समर्थ – रघुनंदन दास जी
- मनोहर जोशी – हिंदू पक्ष के अधिवक्ता
- मुकेश तिवारी – डीएम नायक
निर्माण और निर्देशन टीम
- निर्देशक: योगेश भारद्वाज और रजनीश बैरी
- निर्माता: श्याम चावला
- डीओपी: रवि भट्ट
फिल्म में प्रयोग किए गए लोकेशंस, सेट्स और वेशभूषा सब कुछ उस ऐतिहासिक कालखंड को विश्वसनीय बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
राम मंदिर आंदोलन: 500 वर्षों का संघर्ष
फिल्म ‘695 द अयोध्या’ न केवल 1992, 2019 और 2020 जैसी बड़ी तिथियों को दिखाती है, बल्कि उन सैकड़ों अनाम संघर्षों, जनांदोलनों और बलिदानों को भी सामने लाती है जो इस आंदोलन का आधार रहे। फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे:
- मुगलों के समय से लेकर ब्रिटिश काल तक, राम जन्मभूमि विवाद ने संघर्ष का रूप लिया
- 1949 में बाबा अभिराम दास के समय रामलला का प्राकट्य हुआ
- 1980 के दशक में आंदोलन ने राजनीतिक रूप लिया
- 1992 में ढांचा टूटा और देशभर में विवाद फैला
- 2010 में इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर 2019 में सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला आया
- और अंततः 5 अगस्त 2020 को भूमि पूजन के साथ राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ
भावनात्मक और ऐतिहासिक समर्पण
इस फिल्म का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं बल्कि नई पीढ़ी को इतिहास और समर्पण की भावना से जोड़ना है। इसके माध्यम से दर्शकों को बताया जाएगा कि यह आंदोलन केवल मंदिर निर्माण का नहीं, बल्कि सांस्कृतिक अस्मिता, विश्वास और न्याय का आंदोलन रहा है।
5 अगस्त को अयोध्या में होगी विशेष स्क्रीनिंग
5 अगस्त को जहां एक ओर भूमि पूजन की पांचवीं वर्षगांठ होगी, वहीं उसी दिन इस फिल्म का विशेष प्रीमियर अयोध्या के अवध मॉल में आयोजित किया जाएगा। यह दिन एक बार फिर रामभक्तों और समर्पित कार्यकर्ताओं के लिए गर्व का क्षण बनने जा रहा है।
‘695 द अयोध्या’ महज़ एक फिल्म नहीं बल्कि अयोध्या के आत्मसम्मान, आस्था और संघर्ष का चलचित्र है। यह न केवल पुरानी पीढ़ी के लिए स्मृति है, बल्कि नई पीढ़ी के लिए शिक्षा भी है कि आस्था का मार्ग आसान नहीं होता, लेकिन जब संकल्प दृढ़ हो तो विजय अवश्य मिलती है।