नई दिल्ली। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में यह दावा किया कि भारत आने वाले समय में रूस से तेल खरीदना बंद कर सकता है। ट्रंप ने इसे एक “अच्छा संकेत” बताते हुए कहा कि इससे भारत और अमेरिका के रिश्तों में और मजबूती आएगी।
हालांकि, भारत सरकार ने ट्रंप के इस बयान पर स्पष्ट और सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि “भारत और रूस के संबंध लंबे समय से स्थिर, रणनीतिक और आपसी विश्वास पर आधारित हैं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत की विदेश नीति पूरी तरह अपने राष्ट्रीय हितों पर आधारित है।
भारत-रूस के संबंध: वर्षों पुराना सहयोग
भारत और रूस के संबंध दशकों पुराने और व्यापक हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष, विज्ञान और तकनीकी क्षेत्रों में गहरे संबंध हैं। रूस, भारत के लिए तेल और गैस का एक प्रमुख निर्यातक बना हुआ है।
2022 के बाद से जब रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए, तब भारत ने रूस से सस्ता क्रूड ऑयल खरीदना जारी रखा। इससे भारत को ऊर्जा संकट से बचने में मदद मिली और घरेलू महंगाई को नियंत्रित रखा गया।
भारत-अमेरिका के रिश्ते: साझा हितों की रणनीतिक साझेदारी
रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते भी गहरे और साझेदारीपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच रक्षा, तकनीक, व्यापार और शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत गठबंधन है। उन्होंने कहा, "भारत की नीति संतुलन पर आधारित है। हम किसी के दबाव में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हैं।"
ट्रंप के बयान की पृष्ठभूमि क्या है?
डोनाल्ड ट्रंप 2024 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में फिर से उम्मीदवार बनने की दौड़ में हैं और उनके बयानों में हाल के दिनों में चीन, रूस और भारत को लेकर तीखे सुर देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा था कि, “भारत अब समझ रहा है कि उसे रूस पर अपनी ऊर्जा निर्भरता खत्म करनी चाहिए।” उन्होंने इसे अमेरिका के लिए भी फायदेमंद बताया।
क्या भारत रूस से तेल खरीद बंद करेगा?
फिलहाल भारत की ओर से इस बात की कोई पुष्टि नहीं हुई है कि वह रूस से तेल खरीद पर रोक लगाने की योजना बना रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो:
- भारत अभी सस्ते कच्चे तेल के विकल्प को नहीं छोड़ेगा
- पश्चिमी देशों से आयात पर पहले ही लागत ज्यादा है
- घरेलू जरूरतों और रणनीतिक भंडारण को देखते हुए रूस एक विश्वसनीय साझेदार है
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
विदेश नीति विशेषज्ञ प्रो. शशि अय्यर के अनुसार, "भारत की ऊर्जा नीति व्यावहारिक है। रूस के साथ भारत का रिश्ता केवल तेल तक सीमित नहीं है, बल्कि रक्षा और कूटनीति में भी गहरा है। ट्रंप का बयान चुनावी बयानबाजी हो सकता है, जिसे भारत गंभीरता से नहीं लेगा।"
भविष्य की दिशा: क्या बदलेगी नीति?
भविष्य में यदि वैश्विक स्तर पर कोई बड़ा बदलाव होता है—जैसे कि:
- रूस-यूक्रेन युद्ध का अंत
- संयुक्त राष्ट्र के नए प्रतिबंध
- वैश्विक तेल बाज़ार की पुनर्संरचना
तो भारत अपनी नीति पर पुनर्विचार कर सकता है। लेकिन फ़िलहाल, भारत की प्राथमिकता सस्ती ऊर्जा, राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता बनी हुई है।