रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र कामचटका प्रायद्वीप में मंगलवार को 8.8 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया, जिसे 1952 के बाद का सबसे शक्तिशाली भूकंप बताया जा रहा है। भूकंप की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास के इलाकों में सुनामी का खतरा मंडराने लगा है।
रूसी विज्ञान अकादमी ने चेतावनी दी है कि इस शक्तिशाली झटके के बाद 7.5 तीव्रता तक के आफ्टरशॉक्स आने की आशंका है, जो एक महीने तक क्षेत्र को प्रभावित कर सकते हैं।
कामचटका प्रायद्वीप प्रशांत महासागर के “रिंग ऑफ फायर” नामक क्षेत्र में स्थित है, जो दुनिया के सबसे सक्रिय भूकंपीय और ज्वालामुखीय बेल्टों में से एक है।
क्यों खतरनाक है ‘रिंग ऑफ फायर’?
कामचटका प्रायद्वीप, प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है — यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां कई महाद्वीपों की टेक्टोनिक प्लेटें टकराती हैं। यह बेल्ट विश्व के लगभग 90% भूकंपों का घर है। जापान, इंडोनेशिया, फिलीपींस, अमेरिका (अलास्का व कैलिफोर्निया) और रूस के पूर्वी हिस्से इसी क्षेत्र में आते हैं।
क्या हो सकता है असर?
- तटीय इलाकों में सुनामी की लहरें कुछ घंटों के भीतर पहुंच सकती हैं
- भूकंप के कारण सड़कों, इमारतों और पुलों को नुकसान
- बिजली, पानी और संचार सेवाओं पर असर
- आफ्टरशॉक्स के चलते लोगों को बार-बार झटकों का सामना करना पड़ सकता है
- राहत व बचाव कार्यों में हो सकती है मुश्किल
वैज्ञानिकों की चेतावनी
रूसी विज्ञान अकादमी ने कहा है कि आफ्टरशॉक्स का दौर लगातार हफ्तों तक जारी रह सकता है और उनकी तीव्रता भी 6.0 से 7.5 के बीच हो सकती है। इसीलिए स्थानीय प्रशासन, आपातकालीन टीमें और नागरिकों को सतर्क रहने को कहा गया है।
इतिहास दोहराया?
1952 में कामचटका क्षेत्र में आया भूकंप भी 9.0 तीव्रता का था, जिसने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई थी और प्रशांत महासागर में सुनामी लहरों को जन्म दिया था। इस बार का भूकंप भी उसी तरह का प्रतीत हो रहा है और वैज्ञानिकों ने इसे “historic seismic event” करार दिया है।