सीमा पर जारी तनाव और पहलगाम में हुए आतंकी हमले के कुछ ही महीनों बाद होने वाले भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मैच का कड़ा विरोध जताते हुए पाकिस्तान के साथ किसी भी खेल संबंध को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की है।
विपक्ष का आक्रोश
विपक्षी दलों का कहना है कि जब देश के सैनिक सीमा पर आतंकियों से लड़ रहे हैं और पहलगाम हमले में हमारे जवान शहीद हुए हैं, तो ऐसे समय पर पाकिस्तान के साथ क्रिकेट खेलना शहीदों के बलिदान का अपमान है।
शिवसेना (UBT) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने बीसीसीआई पर निशाना साधते हुए कहा— “प्रिय बीसीसीआई, याद रखिए हम सभी भारतीय क्रिकेट के मैदान पर पाकिस्तान के साथ किसी भी तरह की बातचीत का विरोध करेंगे, चाहे आप इसे किसी भी देश में लेकर चले जाएं। भारतीयों और भारतीय सशस्त्र बलों के खून पर अपना मुनाफा बंद कीजिए। एक तरफ भारत के सीडीएस कह रहे हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी है और दूसरी तरफ आप अपनी खून की कमाई कमाने के लिए दौड़ पड़े हैं।”
पहले भी रद्द हुआ था मैच
गौरतलब है कि हाल ही में इंग्लैंड में आयोजित वर्ल्ड चैंपियनशिप ऑफ लीजेंड्स में भारत-पाकिस्तान का मुकाबला रद्द कर दिया गया था। इस फैसले के पीछे वजह यह थी कि कई पूर्व भारतीय खिलाड़ी—हरभजन सिंह, इरफान पठान और शिखर धवन—ने पहलगाम हमले का हवाला देते हुए पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार कर दिया।
राजनीतिक और जनमानस का दबाव
अब एक बार फिर यह बहस तेज हो गई है कि क्या खेल को राजनीति से अलग रखा जाए या नहीं? जबकि दूसरी ओर, एक बड़ा तबका ऐसा भी है जो मानता है कि आतंकवाद से प्रभावित देश के साथ खेल संबंध रखना उचित नहीं है।