नई दिल्ली- केरल की रहने वाली भारतीय नर्स निमिषा प्रिया को यमन में सुनाई गई मौत की सजा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। यह फैसला भारत और यमन के धार्मिक नेताओं के संयुक्त प्रयासों से संभव हो सका है।
ग्रैंड मुफ्ती ऑफ इंडिया शेख अबूबकर अहमद ने यमन के प्रमुख आलिम शेख उमर बिन हफीज से इस मामले में मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। अंततः मृतक तलाल के परिवार ने सजा पर फिलहाल रोक लगाने पर सहमति जताई है।
क्या है मामला?
निमिषा प्रिया पर यमन में अपने साथी तलाल की हत्या का आरोप है। 2021 में उन्हें यमन की अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि, भारत सरकार और कई सामाजिक संगठनों ने इसे न्यायिक जांच से जुड़ा जटिल मामला बताते हुए मानवीय आधार पर हस्तक्षेप की मांग की थी।
धर्मगुरुओं ने निभाई कूटनीतिक भूमिका
ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने शेख उमर बिन हफीज से बातचीत के दौरान इस्लामी कानून के अंतर्गत ‘माफ़ी और क्षमा’ की परंपरा का हवाला दिया। इसके चलते मृतक के परिवार से पुनर्विचार की अपील की गई।
सूत्रों के अनुसार, शेख हफीज ने भी यमन के स्थानीय धार्मिक नेताओं और तलाल के परिवार पर मानवीय आधार पर सहानुभूति दिखाने का अनुरोध किया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया
भारत के विदेश मंत्रालय ने फिलहाल इस प्रगति पर संतोष जताया है, लेकिन कहा है कि “मामला अब भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। हम कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर लगातार प्रयासरत हैं।