लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर लखनऊ स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रवादी विचारों, त्याग और बलिदान को याद करते हुए उन्हें भारत की एकता और अखंडता का प्रहरी बताया।
सीएम योगी ने कहा, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया के अंदर इन्वेस्टमेंट के एक बेहतरीन डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित हुआ है। औद्योगीकरण की इस नींव को आजाद भारत में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने रखा था। उसका एक वृहद स्वरूप आज देखने को मिल रहा है।
सीएम योगी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने मात्र 33 वर्ष की उम्र में कोलकाता विश्वविद्यालय के सबसे युवा कुलपति के रूप में शिक्षा के क्षेत्र में नया इतिहास रचा। आजाद भारत के पहले कैबिनेट में उन्होंने खाद्य और उद्योग मंत्री के रूप में काम करते हुए आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डॉ. मुखर्जी ने नेहरू सरकार की तुष्टिकरण की नीति का डटकर विरोध किया और उसी कारण उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा भी दिया। उन्होंने अनुच्छेद 370 के खिलाफ आवाज उठाकर एक देश, एक विधान, एक निशान का नारा दिया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डॉ. मुखर्जी के संकल्प को साकार किया है। कश्मीर से धारा 370 हटाकर उसे शेष भारत के साथ एकरूप बनाना, लोकतांत्रिक भारत की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। उन्होंने इसे डॉ. मुखर्जी के सपनों की विजय बताया।
सीएम योगी ने कहा कि आज जिस औद्योगिक भारत की चर्चा वैश्विक मंचों पर हो रही है, उसकी आधारशिला डॉ. मुखर्जी ने आजादी के बाद ही रख दी थी। महामारी के दौरान 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन देना, औद्योगिक निवेश में भारत की मजबूती, ये सब उनकी दूरदृष्टि के प्रतीक हैं।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, भाजपा नेता नीरज सिंह समेत कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सबने डॉ. मुखर्जी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके विचारों को आज के भारत में भी अत्यंत प्रासंगिक बताया।