नई दिल्ली : होटल्स का मकस्द गेस्ट्स को आराम और सुकून देना होता है। लेकिन बार-बार समय की ओर ध्यान जाने से मेहमानों को स्ट्रेस महसूस हो सकता है, खासकर अगर उन्हें किसी मीटिंग, फ्लाइट या अपॉइंटमेंट के लिए जल्दबाजी करनी पड़े। बिना घड़ी के कमरे में रहने से वे ज्यादा रिलैक्स महसूस करते हैं और अपनी मर्जी से समय बिता पाते हैं।
जब गेस्ट समय नहीं देख पाते, तो वे ज्यादा समय तक होटल की सर्विसेज का इस्तेमाल करते हैं। जाहिर है कि इस कारण वे खर्च भी ज्यादा करते हैं। इसके कारण होटल को बिजनेस में फायदा मिलता है। कुछ लोगों को घड़ी की आवाज (Tick-Tock) बहुत डिस्टर्बिंग लगती है, खासकर रात में सोते समय। शांत माहौल बनाए रखने के लिए होटल्स घड़ियां नहीं लगाते, ताकि गेस्ट्स बिना किसी परेशानी के आराम कर सकें।
मॉडर्न होटल्स का इंटीरियर मिनिमलिस्ट और स्टाइलिश होता है। दीवार घड़ियां कई बार डेकोर के अनुकूल नहीं होतीं, इसलिए होटल मैनेजमेंट इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले या अलार्म क्लॉक का इस्तेमाल करते हैं, जो फर्नीचर का हिस्सा होते हैं।
होटल कमरों में घड़ी लगाने से उन्हें मेंटेन करने की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। बैटरी बदलना, समय सेट करना और टूट-फूट की मरम्मत करना होटल स्टाफ के लिए एक एक्स्ट्रा काम होगा। इसके अलावा, अगर घड़ी गलत समय दिखाएगी, तो गेस्ट्स को परेशानी हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय होटल्स में दुनिया भर से गेस्ट्स आते हैं, जो अलग-अलग टाइम जोन से होते हैं। होटल मैनेजमेंट नहीं चाहता कि कोई घड़ी उनके होम कंट्री के समय के अनुसार न होने पर गेस्ट्स को कन्फ्यूजन हो।
एक दूसरा कारण है कि आजकल ज्यादातर लोग अपने फोन, लैपटॉप या स्मार्टवॉच पर समय देखते हैं। इसलिए भी होटल्स में घड़ी की जरूरत नहीं समझी जाती।