गोरखपुर में सांसद राम भुआल निषाद के खिलाफ NBW जारी, फर्जी लाइसेंस के मामले में चल रहे थे गैर हाजिर

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र कुमार ने सुल्तानपुर के सांसद रामभुआल निषाद की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह आदेश पारित किया।

Vin News Network
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गोरखपुर में सांसद राम भुआल निषाद के खिलाफ NBW जारी, फर्जी लाइसेंस के मामले में चल रहे थे गैर हाजिर

गोरखपुर : गोरखपुर कोर्ट ने सपा सांसद रामभुआल निषाद के खिलाफ एक बार फिर गैर जमानती वारंट जारी किया है। यह कार्रवाई तब की गई जब कोर्ट में कई बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद सांसद पेश नहीं हुए। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्ञानेंद्र कुमार ने सुल्तानपुर के सांसद रामभुआल निषाद की अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए यह आदेश पारित किया।

2020 में दर्ज हुआ था केस
दरअसल, यह पूरा मामला 25 जनवरी 2020 से जुड़ा है, जब आयुध विभाग के लिपिक सुनील कुमार गुप्ता ने जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर कैंट थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। FIR के मुताबिक, सांसद रामभुआल निषाद ने जिस डबल बैरल ब्रिच लोडिंग गन (DBBL) का इस्तेमाल किया, उसका लाइसेंस बेचू यादव नामक व्यक्ति के नाम से जारी था। जांच में सामने आया कि वह लाइसेंस कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि बेचू यादव की मौत हो चुकी थी।

जांच में पुष्टि के बाद कोर्ट में दाखिल हुआ आरोप पत्र
मामले की विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने निष्कर्ष निकाला कि सांसद ने मृतक व्यक्ति के नाम पर जारी हथियार लाइसेंस का दुरुपयोग किया। इस आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया गया। इसके बाद कोर्ट ने आरोपी को पेश होने के लिए कई बार समन व वारंट जारी किया, लेकिन हर बार सांसद की ओर से अनुपस्थिति रही।

पेशी से बचते रहने पर कोर्ट ने लिया सख्त रुख
कोर्ट में लगातार गैरहाजिर रहने पर अब न्यायालय ने कठोर रुख अपनाते हुए गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है। साथ ही, आरोपी की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए गोरखपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र भेजा गया है, जिसमें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि अगली सुनवाई पर सांसद की उपस्थिति कोर्ट में हो।

इस पूरे मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज कर दी है। सांसद की भूमिका और उनके खिलाफ चल रही कोर्टी कार्रवाई को लेकर तमाम सवाल उठने लगे हैं। वहीं, अब पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए सांसद को कोर्ट में पेश करे।

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