नई दिल्ली : टोयोटा इनोवा हाइक्रॉस भारत की सबसे सेफ हाइब्रिड MPV बन गई है। उसे भारत न्यू कार असेसमेंट प्रोग्राम (BNCAP या भारत NCAP) से क्रैश टेस्ट में 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग मिली है। क्रैश टेस्ट में कार ने एडल्ट सेफ्टी के लिए 32 में से 30.47 और चाइल्ड सेफ्टी के लिए 49 में से 45 पॉइंट हासिल किए। यह रेटिंग सभी पेट्रोल और स्ट्रॉन्ग-हाइब्रिड वैरिएंट पर लागू होती है। खास बात ये है कि BNCAP में पहली बार किसी हाइब्रिड MPV का क्रैश टेस्ट किया गया है। साथ ही इनोवा हाइक्रॉस टोयोटा की पहली कार है, जिसका BNCAP में क्रैश टेस्ट किया गया।
फ्रंटल इंपैक्ट टेस्ट : 64kmph की स्पीड में हुए फ्रंटल इंपैक्ट टेस्ट में इनोवा हाइक्रॉस को 16 में से 14.47 अंक मिले। इसमें ड्राइवर के सिर, गर्दन, छाती, जांघ, निचले पैर और फीट के हिस्से को अच्छा प्रोटेक्शन मिला। इस टेस्ट में आगे वाले पैसेंजर को अच्छी सुरक्षा मिली, जबकि पैसेंजर के छाती के हिस्से की सुरक्षा ‘पर्याप्त’ पाई गई।
साइड इम्पेक्ट टेस्ट : MPV का 50kmph की स्पीड से साइड इंपैक्ट टेस्ट किया गया, जिसमें इसे 16 में से 16 अंक मिले। इस टेस्ट में सिर, छाती, पेट और पेल्विस के हिस्से को ‘अच्छी’ सेफ्टी मिली।
साइड पोल इम्पेक्ट टेस्ट : इस टेस्ट में भी ड्राइवर के सिर, छाती, पेट और कूल्हों की सेफ्टी को अच्छा पाया गया। इन तीनों टेस्ट की परफॉर्मेंस के बेस पर इनोवा हाइक्रॉस को एडल्ट प्रोटेक्शन कैटेगरी में 32 में से 30.47 पॉइन्ट मिले, जो 5 स्टार सेफ्टी रेटिंग के लिए काफी है।
इनोवा हाइक्रॉस को चाइल्ट प्रोटेक्शन कैटेगरी में 49 में से 45 पॉइन्ट्स मिले, जिससे इस कैटेगरी में भी 5 स्टार क्रैश टेस्ट रेटिंग मिली। टेस्ट में 18 महीने और एक 3 साल के बच्चे के बराबर की डमी को चाइल्ड रेस्ट्रेंट सिस्टम पर उल्टी दिशा की तरफ रखा गया। इस कैटेगरी में कार डायनामिक स्कोर 24 में से 23.57, चाइल्ड रेस्टरेंट सिस्टम (CRS) इंस्टॉलेशन स्कोर 12 में से 12 और व्हीकल असिसमेंट स्कोर 13 में से 9 रहा।
क्रैश टेस्ट में इनोवा हाइक्रॉस को 18 महीने के बच्चे की सुरक्षा के लिए 12 में से 12 पॉइंट मिले। वहीं, 3 साल के बच्चे की सुरक्षा के लिए कार को 12 में से 12 अंक मिले। हालांकि, प्रोटेक्शन के लेवल्स की जानकारी शेयर नहीं की गई है।
क्रैश टेस्ट की प्रोसेस
- टेस्ट के लिए इंसान जैसी 4 से 5 डमी को कार में बैठाया जाता है। बैक सीट पर बच्चे की डमी होती है, जो चाइल्ड ISOFIX एंकर सीट पर फिक्स की जाती है।
- गाड़ी को फिक्स्ड स्पीड पर ऑफसेट डिफॉर्मेबल बैरियर (हार्ड ऑब्जेक्ट) से टकराकर देखा जाता है कि गाड़ी और डमी को कितना नुकसान पहुंचा है। ये तीन तरीके से किया जाता है।
फ्रंटल इम्पैक्ट टेस्ट में कार को 64 kmph की रफ्तार पर बैरियर से टकराया जाता है।
साइड इम्पैक्ट टेस्ट में गाड़ी को 50 kmph की स्पीड पर बैरियर से टकराया जाता है।
पोल साइड इम्पैक्ट टेस्ट में कार को फिक्स स्पीड पर पोल से टकराकर देखा जाएगा। पहले दो टेस्ट में कार के 3 स्टार रेटिंग हासिल करने पर तीसरा टेस्ट किया जाता है।
- टेस्ट में देखा जाता है कि इम्पैक्ट के बाद डमी कितनी डैमेज हुई, एयरबैग और सेफ्टी फीचर्स ने काम किया या नहीं। इन सभी के आधार पर रेटिंग दी जाती है।