लखनऊ : समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं और अपने शुभचिंतकों से अपील की है कि वे इस बार उनके जन्मदिन (01 जुलाई) के मौके पर पुष्पगुच्छ, प्रतिमा, तस्वीर, पार्टी के निशान साइकिल की प्राकृतियों या किसी भी तरह की भेंट की जगह निर्माणाधीन समाजवादी स्मारक में अपना अंश दान दें।
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा कि … इस वर्ष अपने सभी शुभचिंतकों से मेरी विनम्र अपील है कि मेरे जन्मदिन के अवसर पर किसी भी प्रकार की पुष्प गुच्छ भेंट, प्रतिमा, तस्वीर, पार्टी के चिह्न साइकिल की प्रतिकृतियों या किसी भी अन्य प्रकार की भेंट की जगह अपना-अपना योगदान माननीय नेता जी के निर्माणाधीन ‘समाजवादी स्मारक’ में अपने ‘आस्था अंशदान’ के रूप में पार्टी कार्यालय में आधिकारिक रूप से जमा कराएं। समाजवादी मूल्यों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और आपके इस सहयोग के धन्यवाद स्वरूप हर अंशदाता का नाम ‘समाजवादी स्मारक सहयोग पुस्तिका’ में प्रकाशित किया जाएगा। सभी को मेरा अग्रिम धन्यवाद। बता दें कि मुलायम सिंह यादव की याद में सैफई में समाजवादी स्मारक बन रहा है। जिसका निर्माण का काम शुरू हो चुका है। अखिलेश यादव ने अपने शुभचिंतकों से आर्थिक अंशदान की अपील की है।
धीरेंद्र शास्त्री पर अखिलेश यादव के आरोपों पर बीजेपी प्रवक्ता भड़के
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के इटावा में बीते दिनों कथावाचकों के साथ हुई अभद्रता का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। सपा मुखिया अखिलेश यादव इस घटना को लेकर बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं। इसी कड़ी में अब उन्होंने बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को भी आड़े हाथों ले लिया हैं। अखिलेश यादव ने धीरेंद्र शास्त्री पर कथावाचन के लिए अंडर टेबल मोटी फीस लेने का गंभीर आरोप लगा दिया है। इस पर राजनीति और गरमा गई है। अभी धीरेंद्र शास्त्री की ओर से कोई जवाब नहीं आया है, लेकिन बीजेपी ने अखिलेश यादव पर जोरदार पलटवार कर दिया है।
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री महज बहाना है, असली मकसद सनातन की भावनाओं को ठेस पहुंचाना है। मजहबी तुष्टीकरण के भरोसे गोल बंद कराना है। राकेश त्रिपाठी ने कहा कि अखिलेश यादव जानबूझकर धीरेंद्र शास्त्री के बहाने देश के तमाम साधु-संत और कथावाचकों का अपमान करने की चेष्टा कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें लगता है कि उनके इस अपमान से एक मजहबी गोलबंदी होती है। मजहबी तुष्टीकरण होता है। इसी वजह से जानबूझकर उनकी पार्टी के नेता कभी धर्मग्रंथों को लेकर, कभी साधु-संतों को लेकर तो कभी भगवा पर टिप्पणी करते हैं। इसी क्रम में अब कथावाचकों की जाति को लेकर टिप्पणियां करने का काम कर रहे हैं।
बीजेपी प्रवक्ता ने कहा कि अखिलेश यादव की यह कोशिश समाज को बांटने वाली है, विभाजनकारी है। उनकी इस कोशिश से समाज को सिर्फ नुकसान पहुंचता है। इससे अखिलेश यादव को कोई फायदा नहीं मिलने वाला है। इसलिए धर्म, सनातन और समाज पर इस तरह की टिप्पणी करना बंद कीजिए।
बता दें, रविवार को लखनऊ में सपा दफ्तर पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेस के दौरान अखिलेश यादव ने कथावाचकों पर मोटी फीस लेने का आरोप लगाया है। अखिलेश यादव ने कहा कि कई कथावाचक हैं, जो 50 लख रुपये लेते हैं। किसी की हैसियत है कि धीरेंद्र शास्त्री को कथा के लिए अपने घर बुला ले। वह फीस अंडर टेबल लेते हैं। पता लगवा लीजिए धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की फीस कितनी होगी।