ईरान का इजराइल के मोसाद हेडक्वार्टर पर हमला : मिलिट्री इंटेलिजेंस की बिल्डिंग को भी निशाना बनाया, इजराइल ने ईरानी सेना के कमांडर को मारा

इजराइली हवाई हमले में ईरान के नए वॉर चीफ मेजर जनरल अली शादमानी की मौत हो गई है।

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ईरान का इजराइल के मोसाद हेडक्वार्टर पर हमला : मिलिट्री इंटेलिजेंस की बिल्डिंग को भी निशाना बनाया, इजराइल ने ईरानी सेना के कमांडर को मारा

तेल अवीव/ तेहरान : इजराइल और ईरान के बीच 5वें दिन भी संघर्ष जारी है। ईरान ने मंगलवार को तेल अवीव में इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के हेडक्वार्टर पर हवाई हमला किया। इसके अलावा मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़ी खुफिया एजेंसी AMAN की बिल्डिंग को भी निशाना बनाया है।

इजराइली हवाई हमले में ईरान के नए वॉर चीफ मेजर जनरल अली शादमानी की मौत हो गई है। शादमानी ईरान की खतम-अल-अनबिया हेडक्वार्टर्स यानी सैन्य आपात कमान के हेड थे। उन्होंने 4 दिन पहले ही यह पद संभाला था।

उन्हें 13 जून को इजराइली हमले में मारे गए मेजर जनरल गुलाम अली राशिद की जगह यह जिम्मेदारी दी गई थी। राशिद की मौत पिछले शुक्रवार को हुई थी। इजराइली हमलों में अब 224 ईरानी मारे जा चुके है, जबकि 1,481 लोग घायल हुए हैं। वहीं, इजराइल में अब तक 24 लोग मारे गए हैं, जबकि 600 से ज्यादा घायल हैं।

इजराइल- ईरान में जारी संघर्ष के बीच भारत ने अपने नागरिकों को ईरान से निकालना शुरू कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि कुछ भारतीय नागरिकों को आर्मेनिया बॉर्डर के रास्ते देश से बाहर निकाला गया है।

इन छात्रों में ज्यादातर जम्मू-कश्मीर के रहने वाले हैं, जो ईरान के उर्मिया शहर से MBBS की पढ़ाई कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ने ईरान से भारत लौट रहे दो छात्रों के पेरेंट्स से बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय समय के अनुसार 16 जून की रात दो बजे छात्रों को यूनिवर्सिटी कैंपस से आर्मेनिया बॉर्डर तक लाया गया था।

कश्मीर के अनंतनाग के रहने वाले मोहम्मद शफी भट्‌ट ने बताया कि उनकी बेटी तय्यैबा शफी उर्मिया यूनिवर्सिटी में MBBS फाइनल ईयर की छात्रा है। उनकी बेटी उनसे लगातार संपर्क में है। हालांकि, आज बात नहीं हुई है। छात्रों के साथ भारतीय एंबेसी के अधिकारी हैं। सभी बुधवार को भारत पहुंच जाएंगे।

इसी तरह, कश्मीर के शोपियां के रहने वाले मोहम्मद अनवर भट्‌ट ने बताया कि उनकी अपनी बेटी कहकशां अनवर से कल ही बात हुई थी। कहकशां ईरान से बाहर आ गई है। कहकशां के पास ईरान का सिम है, इसलिए आज परिवार की बात नहीं हो सकी है। छात्रों को आर्मेनिया बॉर्डर पर नॉरदुज चौकी से बसों से निकाला जा रहा है। ईरान में 1,500 स्टूडेंट्स सहित लगभग 10 हजार भारतीय फंसे हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि मौजूदा हालात में देश के एयरपोर्ट भले ही बंद हैं, लेकिन लैंड बॉर्डर्स खुले हुए हैं।

विदेशी नागरिकों को ईरान छोड़ने से पहले राजनयिक मिशनों के जरिए ईरान के जनरल प्रोटोकॉल विभाग को अपना नाम, पासपोर्ट नंबर, गाड़ी डिटेल्स, देश से निकलने का समय और जिस बॉर्डर से जाना चाहते हैं, उसकी जानकारी पहले से देनी होगी।

इजराइल डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि उसने सोमवार रात में ईरान के सिक्रेट मिलिट्री कमांड सेंटर पर बम बरसाए। ईरानी सेना के सीनियर अधिकारी इस कमांड सेंटर का इस्तेमाल करते थे।

IDF ऑपरेशन्स डायरेक्टोरेट चीफ मेजर जनरल ओडेड बसियुक ने कहा, ‘हमने ईरान के मेन मीलिट्री इमरजेंसी हेडक्वार्टर को नष्ट कर दिया है। हमले के कारण ईरान के सैन्य अधिकारी भाग गए। हालांकि, इजराइल ईरान में सेना प्रमुखों को एक-एक करके खत्म करने के लिए तैयार है।’

कमांड सेंटर पर हमले के बाद, इजराइल ने एक हवाई हमले में ईरान के सबसे सीनियर सैन्य कमांडर मेजर जनरल अली शादमानी को मार दिया। इजराइल ने 13 जून से अब तक संघर्ष के दौरान ईरान के टॉप सैन्य कमांड के ज्यादातर लोगों को मार गिराया है।

ईरान और इजराइल के बीच युद्ध के बीच ईरान में यूपी के करीब 1000 लोग फंसे हैं। ये लोग ईरान में जियारत (धार्मिक यात्रा) या घूमने के लिए गए हैं। भास्कर ने इनसे वीडियो कॉल पर बात की। ईरान फंसे रुके आशु जायसवाल ने बताया कि 18 जून तक फ्लाइट्स रद्द होने से मजबूरी में रुकना पड़ रहा है। पैसे खत्म होने से दिक्कत आ रही है। आशु 34 लोगों के साथ ईरान गए थे।

इजराइल की तरफ से ईरान पर हमला शुरू होने के बाद से 600 से ज्यादा विदेशी नागरिकों को अजरबैजान के रास्ते ईरान से निकाला गया है। एक सरकारी अधिकारी ने AFP न्यूज एजेंसी को बताया कि निकाले गए लोगों में 17 देशों के लोग शामिल हैं।

इनमें रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान, जर्मनी, स्पेन, इटली, सर्बिया, रोमानिया, पुर्तगाल, संयुक्त राज्य अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात, चीन और वियतनाम के नागरिक शामिल हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैस्पियन सागर तट पर अस्तारा चेकपॉइंट के जरिए बॉर्डर पार करने वाले लोगों को बाकू एयरपोर्ट पर ले जाया जा रहा है और वहां से उनके देश भेजा जा रहा है।

इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को चेतावनी दी है कि उनका हश्र इराक के सद्दाम हुसैन जैसा हो सकता है। काट्ज ने कहा, मैं ईरानी तानाशाह को हमले जारी रखने और इजराइली नागरिकों पर मिसाइल दागने के खिलाफ चेतावनी देता हूं। काट्ज ने सद्दाम हुसैन का जिक्र करते हुए कहा, उन्हें अपने पड़ोसी देश इराक के तानाशाह का हश्र याद रखना चाहिए, जिसने इजराइल के खिलाफ यही रास्ता चुना था।

सद्दाम हुसैन इराक के पांचवें राष्ट्रपति थे। उन्होंने 1979 से 2003 तक शासन किया। उन्होंने ईरान-इराक युद्ध और खाड़ी युद्ध सहित कई प्रमुख संघर्षों के दौरान इराक का नेतृत्व किया।

2003 में, अमेरिका ने इराक पर हमला किया और सद्दाम के शासन को उखाड़ फेंका। सद्दाम हुसैन पर आतंकी संगठन अल-कायदा के साथ संबंध रखने का आरोप लगे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। 30 दिसंबर, 2006 को, उन्हें फांसी दे दी गई।

ईरान के बैंक सेपाह पर मंगलवार को साइबर अटैक हुआ, जिससे ऑनलाइन सेवाएं ठप हो गई हैं। ईरान की सेमी-गवर्नमेंट न्यूज एजेंसी FARS के मुताबिक, इजराइल से जुड़े हैकर्स के एक ग्रुप ने बैंक पर साइबर अटैक की जिम्मेदारी ली है।

साइबर अटैक के कारण बैंक के ग्राहकों को दिक्कतें आ रही हैं। ईरान के साइबर सुरक्षा कमांड ने बैंक अधिकारियों और उनके सिक्योरिटी डिटेल्स को ध्यान में रखते हुए सभी कनेक्टेड डिवाइस के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है।

FARS के मुताबिक, बैंक सेपाह पर साइबर अटैक गैस स्टेशनों पर सेवाओं को प्रभावित कर सकती हैं। क्योंकि गैस स्टेशनों पर सभी लेन-देन इसी बैंक के जरिए होती है।

ईरान ने ईजराइली हमलों के बीच छुट्टी पर गए सभी डॉक्टरों और नर्सों को काम पर वापस बुला लिया है। ईरान के उप स्वास्थ्य मंत्री सईद सज्जाद रजावी ने अपने बयान में कहा, डॉक्टरों और नर्सों की सभी छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं और उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर लगातार मौजूद रहने के लिए कहा गया है।

ईरान ने इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के हेडक्वार्टर पर हवाई हमला किया है। यह बिल्डिंग राजधानी तेल अवीव के हर्जीलिया टाउन में मौजूद है। इसके अलावा मिलिट्री इंटेलिजेंस से जुड़ी खुफिया एजेंसी Aman की बिल्डिंग को भी निशाना बनाया है।

ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मीडिया को दिए बयान में दोनों जगहों पर हमलों की पुष्टि की है। सोशल मीडिया पर मोसाद हेडक्वार्टर पर हमले का वीडियो भी सामने आया है। हमले के बाद वहां भीषण आग लग गई।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह ईरान के साथ बातचीत करने के मूड में नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने पहले कहा था कि वे चाहते हैं कि इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष खत्म हो जाए। उन्होंने कहा था कि वह अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और अमेरिकी मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ को बातचीत के लिए भेज सकते हैं।

बाद में, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह ईरान के साथ बहुत ज्यादा बातचीत नहीं करना चाहते हैं। ट्रम्प ने कहा, मैंने यह नहीं कहा कि ईरान और इजराइल के बीच सीजफायर हो। मैं ईरान के साथ परमाणु समस्या का स्थायी हल चाहता हूं। मैं चाहते हूं कि ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियारों को त्याग दे।

विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने कहा कि टीवी हेडक्वार्टर पर हमला करना इजराइल की बढ़ती हताशा को दिखाता है। यह नेतन्याहू सरकार की कायरता है। जब इजराइल जंग के मैदान में फेल होता है तो वह उन संस्थानों को निशाना बनाता है जो सच्चाई रिपोर्ट करते हैं।

अराकची ने कहा कि इजराइल को पता होना चाहिए कि वे ताकत का इस्तेमाल कर अपना मकसद पूरा नहीं कर सकते हैं।

इजराइल ने सोमवार रात तेहरान में ईरान की सरकारी टीवी चैनल इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) न्यूज चैनल के ऑफिस पर बमबारी की थी। इसके बाद बिल्डिंग में आग लग गई।

इसमें 3 लोगों की मौत हो गई। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी IRNA ने बताया कि मरने वालों में न्यूज एडिटर नीमा रजबपुर और एक स्टाफ मेंबर मासूमे अजीमी शामिल हैं।

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