विन न्यूज़ नेटवर्क। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) को समापन नीलामी सत्र यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS), शेयर बाजार के कारोबारी समय और वायदा एवं विकल्प (F&O) खंड में अनुबंधों के निपटान की व्यवस्था में प्रस्तावित बदलावों पर करीब 20,000 सुझाव मिले हैं। SEBI ने 3 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे तक मिली टिप्पणियों की संख्या 20,000 बताई है।
नियामक ने इन प्रस्तावित बदलावों पर बाजार प्रतिभागियों और आम लोगों से राय मांगी थी। सुझावों की यह संख्या SEBI के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय की ओर से पहले बताए गए 3,500 से अधिक सुझावों के मुकाबले काफी ज्यादा है।
जल्द जारी हो सकता है नया सर्कुलर
परामर्श प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब बाजार की नजर SEBI के अगले कदम पर है। जब चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय से पूछा गया कि CAS को लेकर अंतिम व्यवस्था या सर्कुलर कब तक जारी हो सकता है, तो उन्होंने संकेत दिया कि प्रक्रिया जल्द आगे बढ़ाई जाएगी।
पांडेय ने कहा कि नियामक को मिले सभी सुझावों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रस्ताव में मुद्दों और संभावित समाधानों को स्पष्ट रूप से रखा गया है, इसलिए टिप्पणियों को संकलित और उनका विश्लेषण करने में बहुत अधिक समय नहीं लगेगा। उन्होंने नए सर्कुलर के जल्द आने की संभावना पर सकारात्मक संकेत दिया।
CAS व्यवस्था में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
SEBI ने सितंबर में समापन नीलामी सत्र व्यवस्था और सूचकांक तथा शेयर डेरिवेटिव के समाप्ति वाले दिन निपटान मूल्य तय करने की पद्धति में बदलाव का प्रस्ताव रखा था।
CAS का मुख्य उद्देश्य नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से शेयरों का अंतिम या समापन मूल्य निर्धारित करना है। SEBI ने इक्विटी नकदी बाजार में CAS लागू होने और इसके कारण डेरिवेटिव के निपटान मूल्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को देखते हुए मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा शुरू की है।
नियामक ने कहा है कि इस समीक्षा का उद्देश्य कुछ विशेष समस्याओं का समाधान करना है। इसके लिए बाजार प्रतिभागियों से अलग-अलग संभावित विकल्पों पर सुझाव मांगे गए थे।
ट्रेडिंग टाइम को लेकर भी बाजार की नजर
SEBI के प्रस्ताव में बाजार के कारोबारी समय से जुड़े पहलू भी शामिल हैं। ऐसे में 20 हजार सुझाव मिलने के बाद ट्रेडिंग टाइम को लेकर भी बाजार प्रतिभागियों के बीच चर्चा तेज हो गई है।
हालांकि, अंतिम व्यवस्था क्या होगी, इसका फैसला सुझावों की समीक्षा के बाद ही होगा। फिलहाल SEBI की ओर से अंतिम बदलावों की घोषणा नहीं की गई है।
बॉन्ड बाजार को मजबूत करने पर जोर
SEBI चेयरमैन ने कॉरपोरेट बॉन्ड और डेरिवेटिव बाजार के विकास पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र को मजबूत करने के लिए नियामकीय व्यवस्था, तकनीकी बुनियादी ढांचे और बाजार में भागीदारी—तीनों जरूरी हैं।
SEBI एक्सचेंज के माध्यम से बॉन्ड कारोबार को बढ़ावा देने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत प्राथमिक निर्गम में इलेक्ट्रॉनिक बोली मंच, ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म संचालकों का नियमन और द्वितीयक बाजार में लेनदेन के लिए कोटेशन व्यवस्था को मजबूत करने जैसे कदम उठाए गए हैं।
FPI निवेश को आसान बनाने पर भी काम
पांडेय ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को लेकर कहा कि SEBI का उद्देश्य भारतीय बाजार में उनके प्रवेश और कारोबार को आसान बनाना है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के साथ भी काम किया जा रहा है।
SEBI पहले ही FPI के लिए गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में निवेश की अनुमति समेत कई कदम उठा चुका है। हालांकि, FPI का निवेश अंततः अलग-अलग बाजारों में उपलब्ध अवसरों और संभावित लाभ पर निर्भर करता है। अब CAS, ट्रेडिंग टाइम और F&O सेटलमेंट पर मिले 20 हजार सुझावों के बाद बाजार को SEBI के अंतिम फैसले और नए सर्कुलर का इंतजार है।