ममता बनर्जी को झटके पर झटका, TMC नाम और सिंबल पर पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट

Vin News Network
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ममता बनर्जी के सामने एक दिन में तीन बड़ी चुनौतियां

विन न्यूज़ नेटवर्क। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रहे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने पार्टी के मूल नाम ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ और पारंपरिक ‘फूल और घास’ चुनाव चिह्न को अंतरिम तौर पर फ्रीज कर दिया है। इसके बाद ममता बनर्जी ने आयोग के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। याचिका 18 सितंबर को दाखिल की गई और मामले को 21 सितंबर को जल्द सुनवाई के लिए पेश किए जाने की संभावना है।

ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न

चुनाव आयोग ने आगामी उपचुनावों को देखते हुए दोनों गुटों के लिए अलग-अलग नाम और चुनाव चिह्न तय किए हैं। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ का चुनाव चिह्न दिया गया है। वहीं दूसरे गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिह्न आवंटित किया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए अंतरिम तौर पर लागू है।

नंदीग्राम में TMC उम्मीदवार ने वापस लिया नाम

इसी बीच नंदीग्राम विधानसभा सीट पर ममता बनर्जी के गुट को एक और झटका लगा। उनकी उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने उपचुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। रिपोर्टों के मुताबिक, नामांकन वापस लेने से पहले उनकी राज्य सचिवालय में मुलाकात भी हुई थी। इस घटनाक्रम ने नंदीग्राम उपचुनाव को लेकर सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया है।

ममता ने कांग्रेस उम्मीदवार को दिया समर्थन

संचिता डे के मैदान से हटने के बाद ममता बनर्जी ने नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की बात कही। लेकिन इसके कुछ समय बाद ही मिलन प्रधान को 2007 के नंदीग्राम भूमि आंदोलन से जुड़े एक पुराने हत्या मामले में गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी गिरफ्तारी के समय को लेकर TMC और कांग्रेस की ओर से सवाल उठाए गए हैं।

बंगाल में बयानबाजी हुई तेज

मिलन प्रधान की गिरफ्तारी के बाद TMC नेता कुणाल घोष ने इसे लेकर विरोध जताया और उनकी तत्काल रिहाई की मांग की। दूसरी ओर, बीजेपी नेताओं ने पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग राजनीतिक दावे किए हैं। ऐसे में नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले उपचुनाव से पहले पश्चिम बंगाल की सियासत और गरमा गई है। फिलहाल TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम स्थिति पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और चुनाव आयोग की आगे की कार्यवाही पर नजर रहेगी।

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