विन न्यूज़ नेटवर्क। जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान हिंसा और कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने कमेटी के पुनर्गठन की मांग स्वीकार नहीं की।
अदालत ने कहा कि समिति ने अभी अपनी जांच शुरू ही की है, ऐसे में उसके सदस्यों के खिलाफ अनुमान या पहले से बनी धारणा के आधार पर सवाल उठाना जल्दबाजी होगी। कोर्ट ने HPEC को निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ जांच आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
किन मुद्दों पर सबसे पहले जांच करेगी HPEC?
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को जांच के शुरुआती चरण में प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित हिंसा और बदसलूकी, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों तथा दोनों पक्षों की ओर से संपत्ति को हुए नुकसान जैसे पहलुओं पर ध्यान देने को कहा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यापक संवैधानिक सवालों पर फैसला बाद के चरण में सुप्रीम कोर्ट खुद करेगा।
HPEC का गठन सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों की स्वतंत्र जांच के लिए किया था। समिति की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं।
कमेटी के खिलाफ आपत्तियों पर कोर्ट ने क्या कहा?
कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से HPEC के मौजूदा स्वरूप में बदलाव की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने समिति के एक सदस्य की स्वतंत्रता को लेकर भी सवाल उठाए थे। हालांकि, अदालत ने समिति के खिलाफ पूर्वधारणा के आधार पर कार्रवाई करने से इनकार किया। कोर्ट के मुताबिक, जब जांच अभी शुरुआती चरण में है, तब समिति की निष्पक्षता पर अनुमान के आधार पर संदेह करना उचित नहीं होगा।
अदालत ने यह भी दोहराया कि HPEC का उद्देश्य किसी एक पक्ष का समर्थन करना नहीं, बल्कि तथ्यों की निष्पक्ष जांच करके सुप्रीम कोर्ट की सहायता करना है।
संवेदनशील गवाहों की पहचान रहेगी गोपनीय
सुप्रीम कोर्ट ने जांच प्रक्रिया में सामने आने वाले संवेदनशील और कमजोर गवाहों की सुरक्षा को भी अहम माना है। अदालत ने निर्देश दिया कि ऐसे गवाहों की पहचान गोपनीय रखी जाए और उनके बयान तथा साक्ष्यों को भी पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए।
गवाहों और अन्य संबंधित लोगों को दस्तावेज व सबूत सुरक्षित तरीके से उपलब्ध कराने के लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाए जाने की संभावना पर भी अदालत ने विचार किया है। इससे उन लोगों को जांच में शामिल होने में मदद मिल सकती है, जो अपनी पहचान सार्वजनिक होने को लेकर चिंतित हैं।
दो वकील बने एमिकस क्यूरी
कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मोनिका गुसैन और एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सी. सोलोमन को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। वे अदालत की सहायता करेंगे और मामले में पक्षों के बीच स्वतंत्र भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही HPEC को जल्द से जल्द सदस्य सचिव नियुक्त करने का निर्देश दिया गया है, ताकि जांच से जुड़े प्रशासनिक और रिकॉर्ड संबंधी काम सुचारू रूप से आगे बढ़ सकें। कमेटी से पहली रिपोर्ट भी जल्द दाखिल करने को कहा गया है।
14 वर्षीय प्रदर्शनकारी को सुरक्षा देने का आदेश
सुनवाई के दौरान 14 साल की एक महिला प्रदर्शनकारी और उसके परिवार की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने आया। अदालत को बताया गया कि बच्ची और उसके परिवार को कथित तौर पर धमकियां मिल रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को खतरे का आकलन कर आवश्यक सुरक्षा मुहैया कराने का निर्देश दिया है।
पुलिस को कथित धमकी और उत्पीड़न की शिकायतों की तेजी से जांच करने तथा अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी।