SCO Summit: जिनपिंग से पीएम मोदी की मुलाकात, शहबाज शरीफ से दूरी

Vin News Network
Vin News Network
6 Min Read
SCO Summit: जिनपिंग से पीएम मोदी की मुलाकात

विन न्यूज़ नेटवर्क। शंघाई सहयोग संगठन (SCO) सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकात ने भारत की कूटनीतिक सक्रियता को चर्चा में ला दिया है। खास बात यह रही कि कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी मौजूद थे, लेकिन पीएम मोदी और उनके बीच किसी विशेष बातचीत या द्विपक्षीय मुलाकात की जानकारी सामने नहीं आई।

SCO सम्मेलन के मंच पर भारत, चीन, रूस और पाकिस्तान समेत कई देशों के शीर्ष नेता एक साथ नजर आए। प्रतिनिधिमंडल की आधिकारिक ग्रुप फोटो से पहले पीएम मोदी ने शी जिनपिंग, व्लादिमीर पुतिन और अन्य नेताओं से मुलाकात की। इसी दौरान मोदी और जिनपिंग के बीच हैंडशेक भी हुआ, जिसने खासतौर पर भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में ध्यान खींचा।

गलवान के बाद पहली बार बदले माहौल में मोदी-जिनपिंग आमने-सामने

प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात ऐसे समय हुई है, जब भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद के कारण चुनौतीपूर्ण रहे हैं। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव काफी बढ़ गया था।

गलवान की घटना के बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर दोनों तरफ से सैन्य मौजूदगी बढ़ी और सीमा से जुड़े मुद्दों को लेकर कई दौर की सैन्य एवं राजनयिक बातचीत हुई। ऐसे में SCO जैसे बहुपक्षीय मंच पर दोनों नेताओं का एक-दूसरे से मिलना भारत और चीन के बीच संवाद की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, इस मुलाकात को किसी बड़े द्विपक्षीय समझौते या नीति परिवर्तन के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। लेकिन शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर संवाद क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम जरूर माना जा रहा है।

शहबाज शरीफ भी मौजूद, लेकिन मोदी से नहीं हुई खास बातचीत

SCO सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भी शामिल हुए। ग्रुप फोटो के दौरान भारत और पाकिस्तान के दोनों प्रधानमंत्री एक ही कार्यक्रम में मौजूद थे। इसके बावजूद दोनों नेताओं के बीच किसी प्रमुख द्विपक्षीय बैठक या विस्तृत बातचीत की खबर सामने नहीं आई।

भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद और अन्य विवादित मुद्दों के कारण तनावपूर्ण रहे हैं। ऐसे में किसी बड़े मंच पर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मौजूदगी अपने आप में कूटनीतिक नजरिए से महत्वपूर्ण होती है।

इसी कार्यक्रम से जुड़ा एक और दृश्य चर्चा में रहा, जब शहबाज शरीफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बातचीत करते नजर आए। कार्यक्रम स्थल पर रूसी राष्ट्रपति की सुरक्षा टीम के सदस्यों की सक्रियता भी कैमरों में कैद हुई।

पुतिन के साथ मोदी की अहम बातचीत

SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की। भारत और रूस के बीच लंबे समय से रणनीतिक और आर्थिक संबंध रहे हैं। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा हुई।

रूस-यूक्रेन संघर्ष का मुद्दा भी बैठक में प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने युद्ध के कारण होने वाले मानवीय नुकसान पर चिंता जताते हुए शांति और संघर्ष के समाधान की जरूरत पर जोर दिया। भारत लगातार बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता रहा है।

बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा, उर्वरक और अन्य आर्थिक क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

क्या है शंघाई सहयोग संगठन?

शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है, जिसका गठन 2001 में हुआ था। इसकी शुरुआत चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी।

भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्ण सदस्य बने। इसके बाद ईरान 2023 में और बेलारूस 2024 में संगठन का हिस्सा बना। संगठन का प्रमुख उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, संपर्क और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है।

भारत के लिए क्यों अहम है SCO?

भारत के लिए SCO मध्य एशिया, रूस और चीन जैसे महत्वपूर्ण देशों के साथ बहुपक्षीय स्तर पर संवाद का एक बड़ा मंच है। भारत इस संगठन के माध्यम से आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ व्यापार, ऊर्जा, परिवहन, निवेश और आर्थिक सहयोग से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं सामने रखता है।

SCO के मंच पर पीएम मोदी की शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन के साथ मुलाकातें इस लिहाज से महत्वपूर्ण हैं कि भारत एक ही मंच पर अपने प्रमुख क्षेत्रीय साझेदारों और पड़ोसी देशों के साथ संवाद करता है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा मोदी-जिनपिंग मुलाकात की रही। गलवान के बाद भारत-चीन संबंधों में आई तल्खी के बीच दोनों नेताओं का आमने-सामने आना यह संकेत देता है कि बहुपक्षीय मंचों पर संवाद की गुंजाइश बनी हुई है। वहीं, पाकिस्तान के साथ किसी खास बातचीत का सामने न आना भारत की मौजूदा कूटनीतिक प्राथमिकताओं को भी रेखांकित करता है।

Share This Article
Leave a Comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *