विन न्यूज़ नेटवर्क। NEET परीक्षा से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के दौरान दर्ज एफआईआर और पुलिस कार्रवाई को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों और हिंसक गतिविधियों में शामिल लोगों के बीच अंतर करना आवश्यक है। कोर्ट ने कहा कि जिन लोगों पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं, उन्हें किसी भी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
मुख्य न्यायाधीश (CJI) की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रत्येक एफआईआर की प्रकृति का परीक्षण किया जाएगा और यह भी देखा जाएगा कि आरोपित व्यक्तियों का कोई आपराधिक इतिहास है या नहीं।
सरकार ने कहा- छात्रों को नहीं, अपराधियों को होगी जवाबदेही
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार का उद्देश्य छात्रों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करना नहीं है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में छात्रों की बजाय असामाजिक और आपराधिक तत्व प्रदर्शन में शामिल हो गए थे। ऐसे लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी।
सरकार की ओर से यह भी बताया गया कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में 2,738 लोगों की पहचान की गई है, जिनमें कई के खिलाफ गंभीर आरोप दर्ज हैं।
याचिकाकर्ताओं ने उठाए कई सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए। अदालत में दलील दी गई कि कुछ मामलों में मामूली आरोपों वाले छात्रों को भी कठोर कानूनी प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है।
वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक कारणों से भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता वृंदा ग्रोवर ने अदालत से अनुरोध किया कि छोटे और सामान्य मामलों में छात्रों को राहत देने पर विचार किया जाए।
एक अन्य पक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि प्रदर्शनकारियों की पहचान के लिए फेस रिकॉग्निशन और आधार डेटा जैसे साधनों का इस्तेमाल किस आधार पर किया गया। इस पर सरकार ने जवाब दिया कि केवल तकनीकी माध्यमों पर निर्भर नहीं रहा गया, बल्कि फील्ड वेरिफिकेशन भी किया गया है।
कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई पर भी जताई चिंता
सुनवाई के दौरान घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मियों, विशेषकर महिला अधिकारियों, के साथ दुर्व्यवहार हुआ था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति छात्रों की आड़ लेकर हिंसा करता है तो उसे संरक्षण नहीं मिल सकता। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी पुलिस अधिकारी ने अपनी सीमा से बाहर जाकर कार्रवाई की है, तो उस मामले की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई अब 19 अगस्त को होगी। अदालत ने संकेत दिया कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों की समीक्षा के लिए एक स्वतंत्र समिति के गठन पर विचार किया जाएगा। समिति के अधिकार क्षेत्र, कार्यप्रणाली और जांच के दायरे पर भी अगली सुनवाई में चर्चा होगी। सभी पक्षों को तब तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।