विन न्यूज़ नेटवर्क। नीट पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है। दिल्ली के बाद अब बिहार की राजधानी पटना में भी छात्र संगठनों ने सड़क पर उतरकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की ओर से निकाले गए राजभवन मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया।
प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। छात्रों का आरोप है कि नीट पेपर लीक जैसे गंभीर मामले ने लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक सरकार इस मुद्दे पर ठोस कदम नहीं उठाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
राजभवन मार्च के दौरान बढ़ा तनाव
बुधवार सुबह छात्र संगठन AISA के कार्यकर्ताओं ने पटना में राजभवन (लोकभवन) की ओर मार्च शुरू किया। बड़ी संख्या में छात्र और युवा प्रदर्शन में शामिल हुए। मार्च जैसे ही गांधी मैदान स्थित होटल मौर्या के पास पहुंचा, पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।
पुलिस की रोक के बाद प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की और झड़प में बदल गई। हालात पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस ने पहले प्रदर्शनकारियों को पीछे हटने की चेतावनी दी, लेकिन भीड़ के नहीं हटने पर आंसू गैस के गोले दागे गए। इसके बाद वाटर कैनन से पानी की तेज बौछार कर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने का प्रयास किया गया।
पानी की बौछार और आंसू गैस के बावजूद डटे रहे छात्र
पुलिस की कार्रवाई के बावजूद प्रदर्शनकारी सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए। कई छात्र सड़क पर बैठ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। उनका कहना था कि यह आंदोलन केवल एक परीक्षा का नहीं, बल्कि देश के लाखों युवाओं के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का सवाल है।
छात्रों ने आरोप लगाया कि सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक नीट पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली के आंदोलन को मिला समर्थन
प्रदर्शन के दौरान AISA नेताओं ने कहा कि उनका आंदोलन राष्ट्रीय स्तर पर चल रहे छात्र संघर्ष का हिस्सा है। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी CJP के आंदोलन के प्रति समर्थन भी जताया और कहा कि विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठन इस मुद्दे पर एकजुट होकर आवाज उठा रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
मीडियाकर्मियों के साथ भी हुई धक्का-मुक्की
प्रदर्शन के दौरान कुछ स्थानों पर मीडियाकर्मियों के साथ भी अभद्र व्यवहार और धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं। जानकारी के अनुसार, कवरेज के दौरान कुछ पत्रकारों को प्रदर्शनकारियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। इस दौरान एक समाचार चैनल के संवाददाता के घायल होने की भी सूचना है। अन्य मीडिया कर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की की घटनाएं सामने आईं।
हालांकि छात्र संगठनों की ओर से इस पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
सुरक्षा व्यवस्था रही कड़ी
संभावित तनाव को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने गांधी मैदान और आसपास के इलाकों में भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए थे। पूरे इलाके में बैरिकेडिंग की गई और अतिरिक्त पुलिस बल भी मौजूद रहा। अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीट पेपर लीक विवाद अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर देश के अन्य राज्यों में भी विरोध-प्रदर्शन तेज होने की संभावना जताई जा रही है।