नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए विपक्षी दलों के प्रदर्शन के दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान अखिलेश यादव ने पुलिसकर्मियों से सवाल किया, “पुलिस भाई, मुझे कहां ले जा रहे हो?” उनका यह बयान मौके पर मौजूद लोगों और मीडिया के बीच चर्चा का विषय बन गया।
यह प्रदर्शन 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्र-युवा आंदोलन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में आयोजित किया गया था। विपक्षी दलों का आरोप है कि संसद मार्च के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं पर पुलिस ने बल प्रयोग किया, जिससे कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। इसी मुद्दे को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला।
छात्र आंदोलन के समर्थन में उतरा विपक्ष
प्रधानमंत्री आवास के बाहर आयोजित प्रदर्शन में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता शामिल हुए। नेताओं ने छात्र आंदोलन के समर्थन में आवाज उठाते हुए पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच कराने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों की समीक्षा की मांग की।
प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया था। जैसे ही प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने लगे, पुलिस ने उन्हें रोकते हुए कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में अखिलेश यादव, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
20 जुलाई की कार्रवाई को लेकर बढ़ा विवाद
गौरतलब है कि 20 जुलाई को सीजेपी के संसद मार्च के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा दिल्ली की सड़कों पर उतरे थे। प्रदर्शन के दौरान हालात तनावपूर्ण हो गए, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस कार्रवाई के वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए, जिसके बाद विपक्षी दलों ने सरकार और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
सरकार पर विपक्ष का हमला
विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हर नागरिक का अधिकार है और छात्रों की आवाज को बल प्रयोग के जरिए दबाने की कोशिश उचित नहीं है। विपक्ष ने केंद्र सरकार से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा कारणों से आवश्यक कदम उठाए गए। पुलिस के अनुसार, निषेधाज्ञा लागू होने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, जिसके चलते उन्हें हिरासत में लिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद छात्र आंदोलन और विपक्ष के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़कों तक सियासी टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।