विन न्यूज़ नेटवर्क। उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित गड़बड़ी का मामला अब सिर्फ जांच एजेंसियों तक सीमित नहीं रह गया है। इस प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है। मामले में दो लोगों की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवालों की बौछार कर दी है।
सोमवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने राज्य सरकार और बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
BKTC अध्यक्ष की भूमिका की जांच की मांग
गणेश गोदियाल ने कहा कि अब तक सामने आए तथ्यों को देखते हुए केवल कर्मचारियों तक जांच सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला इतना गंभीर है, तब तक समिति के अध्यक्ष को उनके पद से क्यों नहीं हटाया गया। कांग्रेस का कहना है कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिम्मेदार पदाधिकारियों को जांच पूरी होने तक पद से अलग किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया से शुरू हुआ पूरा मामला
बद्रीनाथ धाम में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं का मुद्दा सबसे पहले जुलाई की शुरुआत में सार्वजनिक हुआ। सोशल मीडिया पर मामला तेजी से चर्चा में आने के बाद बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति सक्रिय हुई और आंतरिक जांच के लिए चार सदस्यीय समिति का गठन किया गया।
जांच के दौरान मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की गई। शुरुआती जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर समिति ने अपने एक अधिकारी को निलंबित कर दिया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू की।
जांच के दौरान हुई गिरफ्तारियां
एफआईआर दर्ज होने के बाद मुख्य आरोपी बताए जा रहे कर्मचारी की तलाश शुरू की गई। पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने कई स्थानों पर छापेमारी के बाद उसे हिरासत में लिया। बाद में अदालत में पेश किए जाने के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
इसके कुछ दिन बाद जांच एजेंसियों ने एक अन्य व्यक्ति को भी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया। जांच के दौरान उसके पास से विदेशी मुद्रा मिलने की बात भी सामने आई, जिसकी जांच अलग से की जा रही है।
SIT की जांच जारी
विशेष जांच दल (SIT) पूरे मामले की कई पहलुओं से जांच कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, वित्तीय रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है। साथ ही मंदिर समिति से जुड़े कुछ अन्य कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा रही है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यदि किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उसके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व और वर्तमान अध्यक्ष आमने-सामने
इस मामले ने केवल राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप को ही नहीं बढ़ाया है, बल्कि बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के वर्तमान और पूर्व पदाधिकारियों के बीच भी बयानबाजी तेज हो गई है।
दोनों पक्ष एक-दूसरे के कार्यकाल में हुई व्यवस्थाओं और निर्णयों पर सवाल उठा रहे हैं। इससे यह मामला और अधिक राजनीतिक और प्रशासनिक चर्चा का विषय बन गया है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और SIT अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है। दूसरी ओर कांग्रेस सरकार से जवाबदेही तय करने और उच्च स्तर पर कार्रवाई की मांग कर रही है।
अब सभी की नजर जांच के अगले चरण पर है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं, तो इस मामले में और भी कार्रवाई संभव मानी जा रही है।