विन न्यूज़ नेटवर्क। सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारों की आवाज़ माने जाने वाले सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल अब एक नए मोड़ पर पहुंच गई है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर लगातार 21 दिनों से आमरण अनशन कर रहे वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद भी विवाद थमता नहीं दिख रहा है। एक ओर वांगचुक ने अस्पताल से अपनी पत्नी के माध्यम से देशवासियों के नाम संदेश जारी किया है, वहीं दूसरी ओर उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने अस्पताल की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए उन्हें निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की मांग को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है।
अस्पताल से दिया जनता के नाम संदेश
अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद सोनम वांगचुक ने अपने आंदोलन को जारी रखने का संकेत दिया है। सोशल मीडिया पर उनकी ओर से साझा किए गए संदेश में लोगों से 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च को सफल बनाने की अपील की गई है। संदेश में उन्होंने लिखा कि यह “आज़ादी का दूसरा आंदोलन” है और इसका उद्देश्य “भयमुक्त भारत और अन्यायमुक्त भारत” का निर्माण है। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से इस अभियान को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।

20 जुलाई के संसद मार्च पर अडिग रुख
वांगचुक के अस्पताल में भर्ती होने के बाद भी उनके समर्थकों ने स्पष्ट किया है कि 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च अपने तय कार्यक्रम के अनुसार होगा। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने भी कहा कि यदि स्वास्थ्य कारणों से सोनम वांगचुक स्वयं मार्च में शामिल नहीं हो पाए, तो वह स्वयं इस मार्च का नेतृत्व करेंगी। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने से उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।
पत्नी ने हाईकोर्ट में लगाई गुहार
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उन्हें किसी निजी अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति मांगी है। उनका कहना है कि सफदरजंग अस्पताल की ओर से इलाज और मेडिकल रिपोर्ट को लेकर पर्याप्त पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है, जिससे परिवार की चिंता बढ़ गई है। उन्होंने अदालत से हस्तक्षेप कर बेहतर और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप
गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल प्रशासन ने परिवार को मौखिक रूप से बताया था कि सोनम वांगचुक के शरीर में पोटैशियम का स्तर 2.9 तक गिर गया है, जो चिकित्सकीय दृष्टि से बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है। लेकिन बाद में जारी आधिकारिक हेल्थ बुलेटिन में इस स्तर का उल्लेख नहीं किया गया। बुलेटिन में केवल इतना कहा गया कि पोटैशियम का स्तर कम हो रहा है।
उनका आरोप है कि परिवार को पूरी मेडिकल रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जा रही और इलाज से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां भी साझा नहीं की जा रहीं। इसी वजह से उन्होंने अस्पताल की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।
कुछ हुआ तो जिम्मेदार होंगे अस्पताल और सरकार
गीतांजलि जे. आंगमो ने यह भी कहा कि यदि सोनम वांगचुक की तबीयत को लेकर कोई अप्रिय घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी अस्पताल प्रशासन और संबंधित सरकारी तंत्र की होगी। उन्होंने यह भी कहा कि परिवार की सहमति के बिना किसी प्रकार की दवा, तरल पदार्थ या अन्य चिकित्सकीय प्रक्रिया नहीं अपनाई जानी चाहिए। इस संबंध में उन्होंने पहले भी सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी।
क्यों उठाया गया प्रदर्शन स्थल से?
18 जुलाई की सुबह दिल्ली पुलिस और चिकित्सा दल जंतर-मंतर पहुंचे और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह तथा अदालत के निर्देशों का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल ले गए। पुलिस का कहना है कि उनका स्वास्थ्य लगातार बिगड़ रहा था और जीवन की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता थी। दूसरी ओर, वांगचुक के समर्थकों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध प्रदर्शन स्थल से हटाया गया। इस कार्रवाई के बाद आंदोलन से जुड़े अन्य कार्यकर्ताओं ने अनशन जारी रखने का ऐलान किया।
मामला अब अदालत और सरकार की निगाहों में
सोनम वांगचुक की सेहत, अस्पताल में इलाज और आंदोलन तीनों मुद्दे अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुके हैं। एक तरफ उनका परिवार चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी तरफ समर्थक संसद मार्च की तैयारियों में जुटे हैं। अब सबकी निगाहें दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले और सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन किस दिशा में जाएगा, इस पर देशभर की नजर बनी हुई है।