PoK में पाकिस्तान के खिलाफ 40वें दिन भी जारी विरोध, मुजफ्फराबाद कूच के लिए ढाई लाख से अधिक लोग जुटे

Vin News Network
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PoK में पाकिस्तान के खिलाफ बगावत

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पाकिस्तान सरकार और सेना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन लगातार 40वें दिन भी जारी है। स्थानीय प्रदर्शनकारियों का दावा है कि यह क्षेत्र के इतिहास के सबसे लंबे जन आंदोलनों में से एक बन चुका है। शुरुआत में महंगाई, बिजली संकट और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब राजनीतिक अधिकारों और प्रशासनिक बदलावों की मांग तक पहुंच गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

महंगाई, बिजली और बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठी आवाज

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में आटा, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं की भारी कमी है। उनका आरोप है कि स्थानीय संसाधनों का पर्याप्त लाभ क्षेत्र की जनता को नहीं मिल रहा। साथ ही सड़क, पुल, रेलवे और एयरपोर्ट जैसी बुनियादी परियोजनाओं के विकास की भी मांग की जा रही है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों और आपूर्ति को लेकर प्रभावी कानून बनाए जाएं तथा स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता दी जाए।

12 विधानसभा सीटों की व्यवस्था खत्म करने की मांग

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में पाकिस्तान में बसे कथित शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों की व्यवस्था समाप्त करना भी शामिल है। उनका आरोप है कि इस व्यवस्था का राजनीतिक रूप से दुरुपयोग किया जाता है। इसके अलावा स्थानीय प्रशासन में अधिक प्रतिनिधित्व, पारदर्शिता और क्षेत्र के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने की मांग भी की जा रही है।

मुजफ्फराबाद कूच के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे

रिपोर्टों के मुताबिक, 15 जुलाई को PoK के विभिन्न इलाकों से बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी मुजफ्फराबाद कूच के लिए एकत्र हुए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बातचीत के आश्वासन के बाद मार्च को कुछ समय के लिए स्थगित किया गया। बताया जा रहा है कि पाकिस्तान सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान की ओर से प्रतिनिधियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की, हालांकि बाद में इसको लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

21 जुलाई तक का अल्टीमेटम

प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर पाकिस्तान सरकार को 21 जुलाई तक का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि तय समय तक ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। दूसरी ओर, पाकिस्तान की ओर से इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, जबकि क्षेत्र की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

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