विन न्यूज़ नेटवर्क। दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से शुक्रवार को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पवन खेड़ा ने मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने वांगचुक और उनके साथ अनशन कर रहे अन्य प्रदर्शनकारियों से स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने का आग्रह किया।
पवन खेड़ा ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण विरोध हर नागरिक का अधिकार है, लेकिन आंदोलन का स्वरूप ऐसा नहीं होना चाहिए जिससे प्रदर्शनकारियों की जान को खतरा पैदा हो जाए।
कांग्रेस ने जताई चिंता
खेड़ा ने बताया कि कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने भी एक दिन पहले सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी चिंता व्यक्त की थी। उनका कहना था कि सरकार की संवेदनहीनता के बावजूद आंदोलनकारियों को अपनी जान दांव पर नहीं लगानी चाहिए।
जंतर-मंतर पहुंचकर पवन खेड़ा ने सोनम वांगचुक से कहा कि यह संघर्ष महत्वपूर्ण है, लेकिन आंदोलन को जारी रखने के लिए कार्यकर्ताओं का सुरक्षित और स्वस्थ रहना भी उतना ही जरूरी है।

सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और डॉ. मनमोहन सिंह के कार्यकाल में सरकारें विरोध करने वालों से संवाद करती थीं, जबकि मौजूदा सरकार बातचीत के बजाय चुप्पी का रास्ता अपना रही है।
खेड़ा के अनुसार, शिक्षा सुधारों और परीक्षा प्रणाली में बदलाव की मांग को लेकर विभिन्न संगठनों और छात्रों ने लगातार आवाज उठाई है, लेकिन सरकार की ओर से सकारात्मक पहल देखने को नहीं मिली।
लोकतंत्र में संवाद जरूरी- पवन खेड़ा
पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर भी लिखा कि जब नागरिक अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल जैसे शांतिपूर्ण तरीके अपनाते हैं, तब सरकार का दायित्व है कि वह उनकी बात सुने। उन्होंने इसे सरकार का “राजधर्म” बताया और कहा कि असहमति होने के बावजूद संवाद लोकतंत्र की मूल भावना है।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी आंदोलन की ताकत उसके समर्थकों के जीवित और सक्रिय रहने में होती है, इसलिए प्रदर्शनकारियों को अपनी बिगड़ती सेहत को देखते हुए अनशन समाप्त करने पर विचार करना चाहिए।
केजरीवाल ने भी किया समर्थन
इससे पहले आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल भी गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने मंच से शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता की आवश्यकता पर जोर दिया।
केजरीवाल ने कहा कि सोनम वांगचुक व्यक्तिगत हित के लिए नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनके मुताबिक, हर छात्र परीक्षा केंद्र अपने सपनों और उम्मीदों के साथ पहुंचता है, लेकिन बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने युवाओं के भरोसे को गहरी चोट पहुंचाई है।
शिक्षा सुधार बना मुख्य मुद्दा
जंतर-मंतर पर चल रहे इस आंदोलन में शिक्षा सुधार, परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता और युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दे प्रमुख रूप से उठाए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पारदर्शी और निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
राजनीतिक दलों के नेताओं के लगातार पहुंचने से यह आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनता जा रहा है। हालांकि, सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
आगे क्या?
फिलहाल सोनम वांगचुक और उनके साथी अनशन जारी रखे हुए हैं। डॉक्टरों की टीम समय-समय पर उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है। दूसरी ओर, विपक्षी दल सरकार से प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बातचीत शुरू करने की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस आंदोलन को लेकर क्या रुख अपनाती है और क्या संवाद की कोई पहल शुरू होती है।