सोने की कीमतों में पिछले कुछ समय से उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। हाल ही में रिकॉर्ड हाई लेवल पर पहुंचने के बाद अब सोने के भाव में गिरावट दर्ज की जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इसके पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें निवेशकों की मुनाफावसूली और वैश्विक बाजार में बदलाव प्रमुख हैं।
रिकॉर्ड ऊंचाई के बाद सोने पर बढ़ा दबाव
सोना हाल ही में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा था, जिसके बाद बड़े संस्थागत निवेशकों (FIIs) और कुछ केंद्रीय बैंकों ने ऊंची कीमतों पर मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण सोने में पहले तेजी आई थी, लेकिन अब निवेशक ऊंचे भाव पर अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं। इसका असर सोने की कीमतों पर देखने को मिल रहा है।
इसके अलावा, कई निवेशक गोल्ड ETF से पैसा निकालकर लिक्विड कैश और शेयर बाजार जैसे दूसरे विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। इससे भी सोने की मांग पर दबाव बढ़ा है और कीमतों में गिरावट आई है।
चांदी की कीमतों में तेजी जारी
वहीं दूसरी ओर चांदी की कीमतों में तेजी देखने को मिली है। 16 जुलाई को भारत में चांदी के भाव में करीब 1.16 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसके साथ ही चांदी की कीमत बढ़कर लगभग 2,20,000 रुपये प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई है।
घरेलू बाजार में आज चांदी करीब 2500 रुपये प्रति किलो महंगी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी मजबूत नजर आई और COMEX पर यह करीब 0.21 प्रतिशत की तेजी के साथ 59.23 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर कारोबार कर रही है।
निवेशकों की नजर अब बाजार के अगले रुख पर
सोने और चांदी की कीमतों में लगातार बदलाव के बीच निवेशकों की नजर अब वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी नीतियों और अंतरराष्ट्रीय बाजार के संकेतों पर बनी हुई है। आने वाले दिनों में इन कारकों के आधार पर कीमती धातुओं की कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।