बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के इस साल के अंत तक स्वेच्छा से ढाका लौटने की संभावनाओं के बीच वहां की अंतरिम सरकार की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। सरकार ने कहा है कि यदि शेख हसीना वापस आती हैं तो उन्हें न्यायिक प्रक्रिया का सामना करना होगा और अपने ऊपर लगे आरोपों के खिलाफ अदालत में अपना पक्ष रखना होगा।
बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के सलाहकार जाहिद उर रहमान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार शेख हसीना की वापसी का स्वागत करती है, क्योंकि इससे न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि हसीना चाहें तो दुनिया के सबसे अच्छे वकीलों को अपने साथ लेकर आएं और अदालत में अपनी बेगुनाही साबित करें। उनके अनुसार, अंतिम फैसला अदालत करेगी और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से संचालित होगी।
जाहिद उर रहमान ने दावा किया कि देश के कई लोग चाहते हैं कि शेख हसीना पर लगे आरोपों के लिए उन्हें कड़ी सजा मिले। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अदालत स्वतंत्र रूप से फैसला करेगी और कानूनी प्रक्रिया के तहत सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (ICT-BD) की कार्यवाही पारदर्शी होगी और उस पर पर्यवेक्षकों की निगरानी के साथ वीडियो कवरेज की भी व्यवस्था की जा सकती है।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना सत्ता से बाहर हो गई थीं और तब से भारत में रह रही हैं। हाल ही में उनके करीबी सूत्रों ने संकेत दिया था कि वह अपनी पार्टी अवामी लीग को फिर से संगठित करने के उद्देश्य से वर्ष 2026 के अंत तक बांग्लादेश लौटने की तैयारी कर रही हैं।
शेख हसीना के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराधों सहित कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल पहले ही उन्हें इन मामलों में दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुना चुकी है। हालांकि, शेख हसीना इन आरोपों और सजा को राजनीतिक प्रतिशोध बताते हुए लगातार खारिज करती रही हैं। इसी मामले में बांग्लादेश सरकार भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग भी कर चुकी है, ताकि वे अपने खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकें।