अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर साफ दिखाई दे रहा है। इस मार्ग पर अनिश्चितता बढ़ने के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने एक बड़ा रणनीतिक कदम उठाने का फैसला किया है। यूएई अब अपने पूर्वी तट पर एक नया बंदरगाह (पोर्ट) विकसित करेगा, जिससे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी। माना जा रहा है कि यह परियोजना वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक सुरक्षित विकल्प साबित हो सकती है।
क्यों उठाना पड़ा यह कदम?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दुबई की प्रमुख लॉजिस्टिक्स कंपनी DP World फुजैराह अमीरात में इस नए पोर्ट का निर्माण करेगी। इसके साथ ही वहां मौजूद मौजूदा बंदरगाह का भी विस्तार किया जाएगा। हाल के दिनों में अमेरिका-ईरान संघर्ष के दौरान क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमलों का असर यूएई तक पहुंचा। एक हमले में मिसाइल के मलबे से दुबई के जेबेल अली पोर्ट के पास आग लगने की घटना भी सामने आई, जिसके बाद वैकल्पिक समुद्री मार्ग की जरूरत और बढ़ गई।
होर्मुज पर तनाव से प्रभावित हुआ व्यापार
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और अन्य जरूरी सामान दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। क्षेत्र में बढ़ते तनाव और समुद्री गतिविधियों पर असर के कारण यूएई के सबसे बड़े कंटेनर पोर्ट जेबेल अली का कामकाज भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, बंदरगाह की गतिविधियां लगभग 90 प्रतिशत तक प्रभावित हुईं, जिससे वैकल्पिक व्यवस्था की आवश्यकता महसूस की गई।
नया पोर्ट कैसे करेगा काम?
प्रस्तावित नया बंदरगाह यूएई के पूर्वी तट पर ओमान की खाड़ी के किनारे विकसित किया जाएगा। यहां आने वाले जहाज सीधे अपना माल उतार सकेंगे और फिर सड़क मार्ग के जरिए दुबई, अबू धाबी तथा अन्य खाड़ी देशों तक सामान पहुंचाया जाएगा। इससे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की जरूरत नहीं होगी और व्यापार में आने वाली बाधाएं काफी हद तक कम हो सकेंगी।
18 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट
परियोजना से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, नया पोर्ट लगभग 18 महीने में तैयार हो सकता है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर सैकड़ों मिलियन डॉलर का निवेश किए जाने की संभावना है। हालांकि, कंपनी ने स्पष्ट किया है कि नया बंदरगाह जेबेल अली पोर्ट का विकल्प नहीं होगा, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में सुरक्षित और वैकल्पिक समुद्री मार्ग के रूप में काम करेगा।
भारत को क्या होगा फायदा?
भारत का पश्चिम एशिया के देशों के साथ तेल, गैस और अन्य वस्तुओं का बड़ा व्यापार है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी तरह की बाधा आती है, तो इसका सीधा असर भारतीय आयात-निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है। ऐसे में यूएई का नया पोर्ट भारत के लिए भी राहत साबित हो सकता है। इससे व्यापारिक आपूर्ति श्रृंखला को अधिक स्थिरता मिलेगी, माल ढुलाई में रुकावट कम होगी और पश्चिम एशिया के साथ भारत का समुद्री व्यापार पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और सुचारु रह सकेगा।