अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे और फंड से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जांच को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिका को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया रजिस्ट्री द्वारा पूरी की जाएगी और जल्द ही इसे सुनवाई के लिए शामिल किया जाएगा। यह मामला मंदिर के दान और वित्तीय प्रबंधन में कथित गड़बड़ी से जुड़ा हुआ है।
याचिकाकर्ताओं ने फंड की जांच के लिए SIT गठन की मांग की
इस मामले में वकील अजय कुमार राय और दिनेश कुमार यादव ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए मांग की है कि राम जन्मभूमि ट्रस्ट से जुड़े फंड की जांच कराई जाए। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि दान की राशि में गड़बड़ी और संभावित भ्रष्टाचार की आशंका है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया है कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया जाए, जो निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करे।
रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की भी की गई मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि बैंक खातों, दान रजिस्टर, ऑडिट रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सुरक्षित रखा जाए। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से यह निर्देश देने का अनुरोध किया है कि किसी भी प्रकार के रिकॉर्ड को नष्ट या उसमें छेड़छाड़ न की जाए, ताकि जांच प्रभावित न हो सके।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच का फैसला
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिका को सूचीबद्ध किया जाएगा और अगली तारीख दी जाएगी। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को निर्देश दिया कि वे सोमवार को पुनः अवकाशकालीन पीठ के समक्ष मामले का उल्लेख करें।
राज्य सरकार को पहले ही सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट
इस बीच, लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में गठित तीन सदस्यीय एसआईटी ने राज्य सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। हालांकि, अधिकारियों के अनुसार मंदिर फंड में कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच अभी भी जारी है। मामले को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।