1993 कोलकाता बम धमाका: दोषी राशिद खान की रिहाई पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक

Vin News Network
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1993 कोलकाता ब्लास्ट के दोषी राशिद खान की रिहाई पर रोक

सुप्रीम कोर्ट ने 1993 के चर्चित कोलकाता बहूबाजार बम धमाके के दोषी मोहम्मद राशिद खान की रिहाई पर फिलहाल रोक लगा दी है। पश्चिम बंगाल सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें आजीवन कारावास की सजा काट रहे राशिद खान को रिहा करने का आदेश दिया गया था। मामले की सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने राशिद खान और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने 5 जून को अपने फैसले में कहा था कि राशिद खान लगभग 33 वर्षों से जेल में बंद है और इस दौरान उसका व्यवहार संतोषजनक रहा है। इसी आधार पर अदालत ने उसकी रिहाई का आदेश दिया था। हालांकि, पश्चिम बंगाल सरकार ने इस फैसले का विरोध करते हुए कहा कि राज्य के सजा समीक्षा बोर्ड ने भी उसकी समय से पहले रिहाई के खिलाफ राय दी थी।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान राशिद खान के वकील ने दलील दी कि वह लंबे समय से जेल में है और कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए रिहाई का आदेश दिया था, इसलिए उसमें हस्तक्षेप नहीं किया जाना चाहिए। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल रिहाई पर रोक लगाने का फैसला किया। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि इस मामले में राशिद खान को मास्टरमाइंड माना गया था और ऐसे मामलों को बेहद गंभीरता से देखा जाना चाहिए।

पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी याचिका में कहा कि आतंकवाद जैसे जघन्य अपराध में दोषी ठहराए गए व्यक्ति को समय से पहले रिहा करना न केवल न्याय व्यवस्था के उद्देश्य के खिलाफ होगा, बल्कि इससे पीड़ितों और उनके परिवारों के साथ भी अन्याय होगा। सरकार का कहना है कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए रिहाई का फैसला उचित नहीं माना जा सकता।

गौरतलब है कि 16 मार्च 1993 की रात को कोलकाता के बहूबाजार इलाके में हुए भीषण बम विस्फोट ने पूरे शहर को दहला दिया था। इस धमाके में 69 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। विस्फोट की तीव्रता इतनी अधिक थी कि आसपास की कई इमारतें भी क्षतिग्रस्त हो गई थीं। यह घटना पश्चिम बंगाल के सबसे भयावह आतंकी हमलों में से एक मानी जाती है।

राशिद खान ने अपनी याचिका में यह भी तर्क दिया था कि इसी मामले में दोषी ठहराए गए एक अन्य आरोपी पन्नालाल जायसूरा को वर्ष 2014 में समय से पहले रिहा किया जा चुका है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद राशिद खान की रिहाई पर रोक बनी रहेगी और अब सभी की नजरें 28 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं।

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