ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से जारी तनाव और संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ा था, जिसका प्रभाव भारत समेत कई देशों पर देखने को मिला। खासकर तेल और एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित होने से कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई संबंधी चिंताएं बढ़ गई थीं। अब दोनों देशों के बीच शांति वार्ता आगे बढ़ने और हालात सामान्य होने के बाद भारत के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के फिर से सुचारु रूप से खुलने के बाद भारत के लिए एलपीजी से भरे करीब 40 टैंकर रवाना हो चुके हैं। इन टैंकरों के भारत पहुंचने से घरेलू और व्यावसायिक गैस आपूर्ति में सुधार होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इससे देश के करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी और गैस की उपलब्धता बेहतर होगी।
ऊर्जा क्षेत्र की विश्लेषण संस्था Kpler के सीनियर एनर्जी एनालिस्ट सुमित रितोलिया के अनुसार, युद्ध के दौरान एलपीजी आयात पर सबसे अधिक असर पड़ा था। भारत का एलपीजी आयात युद्ध से पहले के स्तर की तुलना में लगभग 51 प्रतिशत तक गिर गया था, जिससे स्टॉक बनाए रखने का दबाव बढ़ गया था। उन्होंने यह भी कहा कि आपूर्ति व्यवस्था तुरंत पूरी तरह सामान्य नहीं होगी, बल्कि चरणबद्ध तरीके से सुधार देखने को मिलेगा क्योंकि विभिन्न ईंधनों पर संकट का असर अलग-अलग स्तर पर पड़ा था।
पिछले कुछ महीनों में अंतरराष्ट्रीय तनाव के कारण भारत में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में तेजी देखने को मिली थी। इसका सीधा असर आम लोगों के घरेलू बजट और देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ा। हालांकि अब होर्मुज मार्ग खुलने और ऊर्जा आपूर्ति बहाल होने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है। यदि वैश्विक हालात स्थिर बने रहते हैं, तो उपभोक्ताओं को महंगाई से कुछ राहत मिलने की संभावना है।