घर खरीदने वाले हजारों लोगों की परेशानी से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। अदालत में दाखिल एक याचिका में मांग की गई है कि उन फ्लैट खरीदारों के लिए विशेष राहत योजना बनाई जाए, जिन्हें अब तक घर नहीं मिला है, लेकिन वे बैंक लोन की ईएमआई चुकाने के लिए मजबूर हैं। इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और अन्य संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है।
यह मामला ‘सबवेंशन योजना’ से जुड़ा है, जिसके तहत बैंक या वित्तीय संस्थान स्वीकृत होम लोन की राशि सीधे बिल्डर के खाते में भेज देते हैं। इस योजना में फ्लैट का कब्जा मिलने तक लोन की ईएमआई चुकाने की जिम्मेदारी बिल्डर की होती है। हालांकि, कई मामलों में बिल्डरों ने तय शर्तों के बावजूद ईएमआई का भुगतान बंद कर दिया, जिसके बाद बैंकों ने यह बोझ सीधे फ्लैट खरीदारों पर डाल दिया।
खरीदारों के लिए राहत योजना की मांग
याचिका में मांग की गई है कि रुकी हुई या अधूरी आवासीय परियोजनाओं में फंसे खरीदारों के लिए एक व्यवस्थित ऋण-राहत योजना तैयार की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि निर्माण कार्य की प्रगति के अनुसार ही बैंक लोन की राशि जारी करें, ताकि खरीदारों के हित सुरक्षित रह सकें।
सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ता के खिलाफ किसी भी प्रकार की जबरन कार्रवाई पर रोक लगाने का भी निर्देश दिया है।
बैंक और बिल्डर दोनों उठाएं नुकसान
याचिका में यह भी मांग की गई है कि यदि सबवेंशन योजना के तहत खरीदार को तय समय पर फ्लैट या संपत्ति नहीं मिलती है, तो जारी किए गए लोन की राशि का नुकसान केवल खरीदार पर नहीं डाला जाना चाहिए। इसके बजाय बैंक और बिल्डर दोनों को समान रूप से वित्तीय नुकसान उठाना चाहिए।
लाखों होमबायर्स की उम्मीदें जुड़ीं
यह मामला देशभर के उन हजारों-लाखों घर खरीदारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो वर्षों से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे हैं और बिना घर मिले ईएमआई का बोझ उठा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह कदम ऐसे खरीदारों को राहत दिलाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।