ओमान की खाड़ी के होर्मुज क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के दौरान तीन भारतीय क्रू सदस्यों की मौत के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज हो गई है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस घटना को लेकर अमेरिका के आधिकारिक रुख पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वॉशिंगटन की ओर से जारी बयान में मृत भारतीयों के प्रति न तो संवेदना व्यक्त की गई और न ही किसी प्रकार का अफसोस जताया गया।
शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि एक रणनीतिक साझेदार और मित्र देश से ऐसी असंवेदनशीलता की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी वाणिज्यिक जहाज ने नियमों का उल्लंघन किया था, तो उसे रोकने के लिए अन्य विकल्पों का उपयोग क्यों नहीं किया गया। थरूर ने यह भी पूछा कि क्या जहाज की गति या नियंत्रण प्रणाली को निष्क्रिय कर स्थिति को संभाला नहीं जा सकता था, बजाय इसके कि मिसाइल हमला किया जाए।
इस बीच विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने भी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत कर इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने भारतीय नागरिकों की मौत पर चिंता जताते हुए कहा कि वाणिज्यिक जहाजों के खिलाफ इस तरह की घातक कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती। भारत ने इस मामले में अपने नागरिकों की सुरक्षा और जवाबदेही का मुद्दा प्रमुखता से रखा है।
घटना से जुड़े विवरण के अनुसार, 8 जून को अमेरिकी सेना ने पलाऊ के झंडे वाले ऑयल टैंकर ‘मैरीवेक्स’ को निशाना बनाया था। जहाज पर 24 भारतीय नाविक मौजूद थे, जिन्हें सुरक्षित बचा लिया गया। इसके बाद 10 जून को पलाऊ के ही झंडे वाले एक अन्य टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर हमला हुआ, जिसमें 24 भारतीय क्रू सदस्य सवार थे। इसी हमले में तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई।
इसके अलावा, हाल ही में गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले टैंकर ‘जलवीर’ को भी निशाना बनाए जाने की खबर सामने आई थी। इस जहाज पर 20 भारतीय नागरिक मौजूद थे। लगातार हो रही इन घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं।
होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और प्रभावित भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क में है।