उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को कथित रूप से सड़क किनारे बनाए गए एक अस्थायी टेंट में रात बितानी पड़ी। बताया जा रहा है कि उनके लिए पहले से तय रात्रि विश्राम स्थल पर अनुमति न मिलने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई।
जानकारी के अनुसार, स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपनी ‘गौ विष्टि यात्रा’ के तहत 3 जून को कन्नौज पहुंचे थे। उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था छिबरामऊ क्षेत्र के सलेमपुर स्थित एक निजी विद्यालय में की गई थी। हालांकि आयोजकों का आरोप है कि प्रशासन ने अंतिम समय में वहां ठहरने की अनुमति देने से इनकार कर दिया, जिसके चलते पहले से निर्धारित कार्यक्रम को रद्द करना पड़ा।
इसके बाद शंकराचार्य ने पाल चौराहा स्थित स्वागत स्थल पर ही रात्रि विश्राम करने का निर्णय लिया। वहां उनके लिए अस्थायी टेंट लगाया गया, जहां पूरी रात सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल भी तैनात रहा। सहयोगियों का दावा है कि भीषण गर्मी के बावजूद टेंट में बिजली, पंखे और अन्य आवश्यक सुविधाओं की कोई व्यवस्था नहीं थी। ऐसे में सेवकों ने हाथ के पंखों से हवा कर उन्हें राहत पहुंचाने का प्रयास किया।
गुरुवार सुबह फर्रुखाबाद रवाना होने से पहले पत्रकारों से बातचीत में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि उनकी यात्रा लगातार जारी रहेगी। उन्होंने बताया कि अब तक वे लगभग 150 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा कर चुके हैं। उनका कहना है कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य गाय को ‘राष्ट्र माता’ का दर्जा दिलाने की मांग को जन-जन तक पहुंचाना, गौ-संरक्षण को बढ़ावा देना और धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
इसके बाद वह अपने काफिले के साथ फर्रुखाबाद के लिए रवाना हो गए, जबकि इस पूरे घटनाक्रम को लेकर क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है।