प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा देशवासियों से एक साल तक सोना न खरीदने और पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने की अपील का असर अब बाजारों में दिखाई देने लगा है। राजस्थान की राजधानी जयपुर के प्रसिद्ध जौहरी बाजार में आम दिनों की तुलना में ग्राहकों की संख्या कम नजर आई। व्यापारियों का कहना है कि लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसका सीधा असर ज्वेलरी कारोबार पर पड़ रहा है। हालांकि, कई व्यापारियों ने यह भी कहा कि यदि यह फैसला देशहित और विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने के लिए है तो वे कुछ हद तक नुकसान सहने को भी तैयार हैं।
जयपुर के सर्राफा बाजार में सोने की कीमत फिलहाल करीब 1.52 लाख रुपये प्रति दस ग्राम बनी हुई है और प्रधानमंत्री की अपील के बाद कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं आया है। बाजार में पहुंचे ज्यादातर ग्राहकों का कहना है कि वे केवल शादी-विवाह और पारिवारिक रस्मों के कारण ही सोना खरीदने आए हैं। कई लोगों ने कहा कि भारतीय परंपरा में शादी-ब्याह के दौरान सोना खरीदना जरूरी माना जाता है, इसलिए इसे पूरी तरह टालना संभव नहीं है। वहीं कुछ ग्राहकों ने पीएम मोदी की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि वे आने वाले समय में गैर जरूरी खरीदारी से बचेंगे।
दूसरी तरफ ज्वेलर्स और व्यापारियों ने चिंता जताई है कि यदि लोग लंबे समय तक सोना खरीदना कम कर देते हैं तो कारोबार पर 25 से 30 प्रतिशत तक असर पड़ सकता है। व्यापारियों का कहना है कि इस स्थिति में दुकानों और शोरूम का खर्च चलाना मुश्किल हो जाएगा और कर्मचारियों की छंटनी जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। ज्वेलर्स ने सरकार से मांग की है कि यदि एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की जा रही है तो व्यापारियों को टैक्स और बिजली बिल जैसी राहत भी दी जानी चाहिए, ताकि कारोबार को संभाला जा सके।
आम लोगों के बीच भी इस अपील को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे देशहित में जरूरी कदम बता रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में सोने का विशेष महत्व है, इसलिए इसे पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। खासतौर पर शादी और त्योहारों के दौरान सोने की खरीदारी को लोग शुभ मानते हैं।
वहीं प्रधानमंत्री की पेट्रोल-डीजल बचत की अपील पर भी चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली पेट्रोल डीलर एसोसिएशन के महासचिव विवेक बनर्जी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल और सोना दोनों ही विदेशों से आयात किए जाते हैं और इन्हें खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा की जरूरत पड़ती है। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ा है, इसलिए सरकार लोगों से गैर जरूरी खर्च कम करने की अपील कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल-डीजल एक जरूरी वस्तु है और लोग पहले से ही उतना ही ईंधन खरीदते हैं जितनी उन्हें आवश्यकता होती है, इसलिए इस अपील का पेट्रोल कारोबार पर ज्यादा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस अपील के बाद देशभर में आर्थिक बचत, विदेशी मुद्रा संरक्षण और आम लोगों की जरूरतों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ सरकार इसे आर्थिक मजबूती की दिशा में कदम बता रही है, वहीं व्यापारी वर्ग अपने कारोबार और रोजगार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित नजर आ रहा है।