भारत की जड़ों से जुड़ने का अभिनव प्रयास
मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक परंपरा और राष्ट्रीय आत्मगौरव के पुनर्जागरण का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन देश को उसकी प्राचीन जड़ों और सनातन विरासत से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है।
काशी और सोमनाथ: सभ्यता के दो अमर स्तंभ
सीएम योगी ने कहा कि काशी और सोमनाथ भारत की सभ्यागत चेतना के दो अमर ज्योति स्तंभ हैं। उत्तर में मां गंगा के तट पर स्थित बाबा विश्वनाथ धाम और पश्चिम में सागर किनारे विराजमान प्रथम ज्योतिर्लिंग भगवान सोमनाथ महादेव भारतीय संस्कृति की अनंत शक्ति का प्रतीक हैं। काशी ने जहां सनातन की आध्यात्मिक धारा को अक्षुण्ण बनाए रखा, वहीं सोमनाथ ने भारत के स्वाभिमान और पुनर्जागरण की लौ को सदैव प्रज्ज्वलित रखा।
सनातन संस्कृति को मिटाना असंभव
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास इस बात का साक्षी है कि सनातन संस्कृति पर अनेक बार आक्रमण हुए, लेकिन इसे कभी पराजित नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि विनाश क्षणिक होता है, जबकि सृजन शाश्वत होता है। महमूद गजनवी सहित कई विदेशी आक्रांताओं ने सोमनाथ मंदिर पर बार-बार हमले किए और उसके वैभव को समाप्त करने का प्रयास किया, लेकिन भारत की आत्मा को मिटाया नहीं जा सका। आज काशी विश्वनाथ धाम और सोमनाथ मंदिर भारत के गौरव और स्वाभिमान की अमर गाथा सुना रहे हैं।
सरदार पटेल के संकल्प का हुआ स्मरण
सीएम योगी ने लौहपुरुष Sardar Vallabhbhai Patel को याद करते हुए कहा कि उन्होंने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया था। तमाम चुनौतियों और विरोध के बावजूद उन्होंने इस कार्य को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण केवल मंदिर निर्माण नहीं था, बल्कि यह दासत्व से मुक्ति और राष्ट्र की आत्मप्रतिष्ठा का उद्घोष था।
आध्यात्मिक स्थलों के विकास का विरोध करने वालों पर तंज
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज भी कुछ शक्तियां भारत के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का विकास नहीं देखना चाहतीं। उन्होंने कहा कि यही लोग पहले सोमनाथ मंदिर की पुनर्प्रतिष्ठा और अयोध्या में राम मंदिर निर्माण में भी बाधाएं खड़ी करते रहे। लेकिन प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आज भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत को नए गौरव के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत कर रहा है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
सोमनाथ संकल्प महोत्सव के दौरान देश के प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से माहौल को भक्तिमय बना दिया। कथक नृत्यांगना अंकिता भट्टाचार्या ने शिव तांडव की मनमोहक प्रस्तुति दी, जबकि डॉ. दिव्या श्रीवास्तव और उनकी टीम ने भगवान सोमनाथ की स्तुति प्रस्तुत की। वहीं बनारस घराने के अंशुमान महाराज और साथी कलाकारों के सरोद वादन ने उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक आनंद से भर दिया।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में योगी सरकार के कई मंत्री, जनप्रतिनिधि, विद्वान और सामाजिक हस्तियां मौजूद रहीं। आयोजन में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों को भारतीय परंपरा और संस्कृति के गौरव का अनुभव कराया।