पप्पू यादव ने महिलाओं को लेकर दिए गए अपने विवादित बयान के बाद बढ़ते विरोध के बीच सार्वजनिक रूप से माफी मांगी, लेकिन इस माफी के साथ एक शर्त भी जोड़ दी। उन्होंने कहा कि यदि उनके बयान से राजनीति में सक्रिय महिलाओं की भावनाओं को ठेस पहुंची है, तो वे उनसे माफी मांगते हैं, लेकिन यह माफी केवल “बहनों और बेटियों” के लिए है, नेताओं के लिए नहीं। उनके इस बयान के बाद सियासी गलियारों में बहस और तेज हो गई है।
उन्होंने अपनी सफाई में यह भी कहा कि उनका उद्देश्य किसी महिला का अपमान करना नहीं था और उन्होंने किसी की मां या बेटी के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल नहीं किया। इसके बावजूद, उनके मुताबिक, विवाद के दौरान उनकी पत्नी और बेटी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई, जिससे उन्हें व्यक्तिगत रूप से ठेस पहुंची। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणियां ऐसे लोगों की ओर से आईं, जिन्हें वह अपने परिवार जैसा मानते हैं, और यह बात उन्हें सबसे ज्यादा आहत करती है।
पप्पू यादव ने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई राजनीति में फैली “गंदगी” और भ्रष्टाचार के खिलाफ है। उन्होंने दावा किया कि कुछ ऐसे नेता हैं, जिनके खिलाफ यौन उत्पीड़न जैसे गंभीर आरोपों के प्रमाण सार्वजनिक रूप से मौजूद हैं, और वे ऐसे लोगों को बेनकाब करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वे राजनीति में महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खड़े हैं और किसी भी तरह के शोषण को बर्दाश्त नहीं करेंगे।
इस पूरे विवाद के दौरान राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं की भागीदारी के साथ विरोध-प्रदर्शन और रैलियां आयोजित की गईं, जिनमें उनसे बिना शर्त माफी की मांग की गई। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पप्पू यादव ने सवाल उठाया कि जब अन्य मामलों में महिलाओं पर अत्याचार हुआ जैसे छात्राओं या अन्य पीड़ितों से जुड़े घटनाक्रम तब उनके विरोधियों ने उतनी मुखरता से आवाज क्यों नहीं उठाई।
अंत में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य राजनीतिक व्यवस्था को साफ करना और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया। हालांकि, उनके इस “शर्तों वाली माफी” के बाद भी विवाद पूरी तरह थमता नजर नहीं आ रहा है और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।