अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अगर ईरान मंगलवार रात तक समझौते के लिए राजी नहीं होता है तो उसके खिलाफ सख्त सैन्य कार्रवाई की जाएगी. ट्रंप ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि उनके पास ईरान के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना तैयार है.
उन्होंने अपनी बात में साफ किया कि इस कार्रवाई के तहत ईरान के पुलों और बिजली केंद्रों को भारी नुकसान पहुंचाया जा सकता है. ट्रंप का दावा है कि उनकी सेना यह काम महज चार घंटों के भीतर पूरा करने की ताकत रखती है.
इस बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव काफी बढ़ गया है. ट्रंप की इस चेतावनी पर ईरान की तरफ से भी कड़ी प्रतिक्रिया आई है. ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर यानी आईआरजीसी के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने ट्रंप की बातों को पूरी तरह गलत बताया है.
जुल्फिकारी ने कहा कि ट्रंप की ये धमकियां केवल उनकी पिछली नाकामियों को छिपाने की एक कोशिश है. उन्होंने यह भी कहा कि ईरान अपनी सैन्य गतिविधियों को कम नहीं करेगा और अमेरिका या इजरायल की किसी भी कार्रवाई का डटकर मुकाबला किया जाएगा.
ईरान के सुप्रीम लीडर मुज्तबा खामेनेई ने भी इस मामले पर अपनी राय रखी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर एक पोस्ट शेयर की है. खामेनेई ने कहा कि ईरान की सेना को कमजोर करने की कोई भी कोशिश सफल नहीं होगी.
उन्होंने साफ किया कि बाहरी दबाव या धमकियों से ईरान के सैन्य अभियानों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. खामेनेई का मानना है कि देश की सुरक्षा और रणनीतिक फैसले किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेंगे.
फिलहाल दोनों देशों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. ट्रंप ने मंगलवार रात 12 बजे तक का समय दिया है. उन्होंने अपनी योजना के बारे में बताते हुए कहा कि सेना ईरान के अहम ठिकानों को निष्क्रिय करने के लिए तैयार है.
दूसरी तरफ ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस विवाद को लेकर काफी चिंता जताई जा रही है क्योंकि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की शांति पर पड़ सकता है. आने वाले कुछ घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए बहुत महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.