नासा ने फ्लोरिडा, अमेरिका से आर्टेमिस-2 मिशन लॉन्च किया है. इस मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री 10 दिनों की चंद्र यात्रा पर रवाना हुए हैं. यह मिशन साल 2017 में शुरू किए गए नासा के आर्टेमिस कार्यक्रम का हिस्सा है. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानवीय उपस्थिति के लिए आधार तैयार करना है. पिछले 50 वर्षों में यह पहली बार है जब नासा को चंद्रमा की ओर जा रहे किसी मानव-युक्त अंतरिक्ष यान से निरंतर सिग्नल मिल रहे हैं.
इस मिशन के चालक दल में रीड वाइजमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टीना कोच और जेरेमी हैनसेन शामिल हैं. ये अंतरिक्ष यात्री ओरियन कैप्सूल में सवार होकर पृथ्वी से लगभग 4,06,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे. यह दल चंद्रमा की सतह पर उतरे बिना उसकी कक्षा का चक्कर लगाकर वापस लौटेगा. यह मिशन मनुष्यों को अंतरिक्ष की उस दूरी तक ले जाएगा जहाँ तक पहले कोई मानव-युक्त यान नहीं पहुँचा है.
लॉन्च के बाद ओरियन कैप्सूल रॉकेट के ऊपरी चरण से अलग हो चुका है. अंतरिक्ष यात्री अब यान के मैनुअल कंट्रोल और स्टीयरिंग की जांच कर रहे हैं. यह दल पृथ्वी की एक उच्च अंडाकार कक्षा में 25 घंटे बिताएगा ताकि यान की कार्यक्षमता का परीक्षण किया जा सके. इसके बाद यान ‘फ्री-रिटर्न ट्रैजेक्टरी’ मार्ग पर आगे बढ़ेगा. यह मार्ग पृथ्वी और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल का उपयोग करके यान को वापस लाने में सहायक होता है.
यह मिशन नासा के स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) रॉकेट की तकनीकी क्षमता का परीक्षण है. 30 मंजिला ऊंचे इस रॉकेट को गहरे अंतरिक्ष में मानव मिशनों के संचालन के लिए डिज़ाइन किया गया है. इस मिशन के दौरान एकत्र किए गए तकनीकी डेटा का उपयोग भविष्य के चंद्र लैंडिंग मिशनों की योजना बनाने के लिए किया जाएगा.