भाजपा के सबसे युवा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने असम के धेमाजी में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) के एक कार्यक्रम का हवाला देते हुए दावा किया कि जब राहुल गांधी को असमिया सम्मान का प्रतीक ‘गमोसा’ भेंट किया गया, तो उन्होंने उसे पहनने के बजाय उतारकर एक तरफ रख दिया।
नितिन नवीन ने इस घटना को असमिया अस्मिता से जोड़ते हुए कहा, “असम के लोग अब जागरूक हो चुके हैं। वे उन लोगों को कभी माफ नहीं करेंगे जो उनके सम्मान के प्रतीकों के साथ खिलवाड़ करते हैं।” उन्होंने आगे बेहद तीखा हमला करते हुए कहा कि जो व्यक्ति गमोसा का अपमान करता है, वह मस्जिद जाने से पहले सिर पर टोपी पहनना नहीं भूलता। भाजपा अध्यक्ष का यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस की ‘तुष्टीकरण की राजनीति’ पर प्रहार माना जा रहा है।
भाजपा इस चुनाव में ‘गमोसा’ को असमिया पहचान और गौरव के सबसे बड़े प्रतीक के रूप में पेश कर रही है। नितिन नवीन ने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे हर बूथ पर कम से कम 50% वोट सुनिश्चित करें ताकि असमिया संस्कृति का अपमान करने वालों को करारा जवाब दिया जा सके। उन्होंने विश्वास जताया कि असम की जनता भाजपा को लगातार तीसरी बार सेवा का मौका देकर ‘हैट्रिक’ लगवाएगी।
दूसरी तरफ, कांग्रेस ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए इसे भाजपा की ध्रुवीकरण की कोशिश करार दिया है। हालांकि, चुनाव से ठीक पहले ‘गमोसा’ और ‘टोपी’ के इस विवाद ने असम के सियासी तापमान को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। 9 अप्रैल को होने वाले मतदान में यह देखना दिलचस्प होगा कि ‘अस्मिता’ का यह मुद्दा मतदाताओं को कितना प्रभावित करता है।